जँभाई का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ट्रेडमिल की जगह ट्रेडकाउच प्रचलन में आ जाएगा जिस पर घंटा भर बैठ कर जँभाई लेते रहने से छंटाक भर वज़न बढ़ने की शर्तिया गारंटी होगी .
- जो लोग राम राम कहकर जँभाई लेते हैं ( अर्थात आलस से भी जिनके मुँह से राम नाम का उच्चारण हो जाता है ) पापों के समूह ( कोई भी पाप ) उनके सामने नहीं आते ।
- भावार्थ : - जो लोग राम-राम कहकर जँभाई लेते हैं ( अर्थात आलस्य से भी जिनके मुँह से राम-नाम का उच्चारण हो जाता है ) , पापों के समूह ( कोई भी पाप ) उनके सामने नहीं आते।
- पाँच उपवायु को देखें , नाग उदगार ( बमन ) में , कुर्म नेत्रोंमीलन में , कृकल छींकने में , देवदत्त जँभाई लेने में और सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त धनञ्जय वायु मृत शरीर का भी साथ नहीं छोड़ता।
- ०२- प्रश्न मैं चबाती और छींकती हूँ बिना आवाज बंद कर लेती हूँ अपना मुँह जब आती है जँभाई मैं काटती नहीं हूँ होंठ और हाथों के नख न ही मैं अवरुद्ध कर पाती हूँ वायु का बहाव ऐसा क्यों / क्या मैं नहीं रह गई हूँ मनुष्य?
- मैं चबाती और छींकती हूँ बिना आवाज बंद कर लेती हूँ अपना मुँह जब आती है जँभाई मैं काटती नहीं हूँ होंठ और हाथों के नख न ही मैं अवरुद्ध कर पाती हूँ वायु का बहाव ऐसा क्यों / क्या मैं नहीं रह गई हूँ मनुष्य ?
- इन पाँच प्राणों के अतिरिक्त शरीर में ‘ देवदत्त ' , ‘ नाग ' ‘ कृंकल ' , ‘ कूर्म ' एवं ‘ धनंजय ' नामक पाँच उपप्राण हैं , जो क्रमशः छींकना , पलक झपकाना , जँभाई लेना , खुजलाना , हिचकी लेना आदि क्रियाओं को संचालित करते हैं।
- इन पाँच प्राणों के अतिरिक्त शरीर में ‘ देवदत्त ' , ‘ नाग ' ‘ कृंकल ' , ‘ कूर्म ' एवं ‘ धनंजय ' नामक पाँच उपप्राण हैं , जो क्रमशः छींकना , पलक झपकाना , जँभाई लेना , खुजलाना , हिचकी लेना आदि क्रियाओं को संचालित करते हैं।
- भावार्थ : - जब एक साधारण मनुष्य को भी ( आलस्य से ) जँभाई लेते समय ' राम ' कह देने से ही सब सिद्धियाँ सुलभ हो जाती हैं , तब श्री रामचन्द्रजी के प्राण प्यारे भरतजी के लिए यह कोई बड़ी ( आश्चर्य की ) बात नहीं है॥ 311 ॥