जगण का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ऽऽ ) , मगण (ऽऽऽ), तगण (ऽऽ।), रगण (ऽ।ऽ), जगण (।ऽ।), भगण (ऽ।।), नगण (।।।) और सगण (।।
- इसी के साथ दोहे के प्रथम शब्द में जगण अर्थात 121 मात्राओं का प्रयोग वर्जित है।
- हर पदांत में गुरु हो तथा जगण ( ISI लघु गुरु लघु ) कहीं न हो।
- विषय ( पहले तीसरे)चरणों का आरम्भ जगण नहीं होना चाहिये और सम (दूसरे-चौथे) चरणों का अन्त लघु होना चाहिये.
- विषय ( पहले तीसरे)चरणों का आरम्भ जगण नहीं होना चाहिये और सम (दूसरे-चौथे) चरणों का अन्त लघु होना चाहिये.
- इसका स्वरुप इस प्रकार से है : ऽऽ । ऽऽ । ।ऽ । ऽऽ तगण तगण जगण दो गुरु
- ( संकेत : बसु = 8 , जन = जगण नहीं , गंत = गुरु से अंत )
- 6 - दोहे के सम चरणों के प्रथम शब् द में जगण अर्थात 121 मात्राओं का प्रयोग वर्जित है।
- विषम ( पहले और तीसरे) चरणों के आरम्भ जगण नहीं होना चाहिये और सम (दूसरे-चौथे) चरणों अन्त में लघु होना चाहिये।
- इस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः जगण , तगण, जगण और रगण के क्रम से 12 वर्ण होते हैं ।