जपजी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- आदि गुरु श्री नानकजी साहिब जपजी में कहते हैं - प्रभू - परमेश्वर के गुण गान के श्रवन करनें से . ......
- परम प्यार में डूबे भक्त द्वारा जिस स्थान पर जपजी का पाठ किया जाता है वह स्थान तीर्थ बन जाता है ।
- जपजी का जप करता जब अपनें को जप में नमक के पुतले की भाँती घुला देता है , जब उसके पास .....
- माँ जपजी साहब पढ़ती पर देवताओं की पूजा भी करती , पर अक्सर रो पड़ती क्यों कि उसे पति के इस्लामी तरीके पसंद नहीं थे!
- जपजी साहिब का मूल मंत्र वह मार्ग है जो संसार से एक ओंकार में पहुंचाता है लेकीन इसके साथ इमानदारी से रहना चाहिए ।
- वेदों का आत्मा है , एक ओंकार और जपजी साहीब का प्रारम्भ आदि गुरु जी एक ओंकार , सत नाम से करते हैं ।
- जपजी साबिब में वह ऊर्जा है जो तन , मन एवं बुद्धि में परम प्रीति को प्रवाहित करके कहती है - अब देख की .....
- गुरुनानक जयंती पर गुरुबाणी पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई , जिसमें जपजी साहिब और चौपाईजी साहिब के प्रतियोगिता जूनियर और सीनियर वर्ग में आयोजित की गई।
- मां सुबह के इंतज़ार में आंखें जपजी साहब के गुटके में गड़ाये थी तो पिता कुर्सी पर बैठे बैठे आगे की रणनीति सोच रहे थे।
- जपजी साहिब का सफ़र कुछ इस प्रकार का रहा - एक ओंकार , सत नाम करता पुरुष निर्भैय , निर्बैय अकाल मूरत , अजुनी , सैभंग