जाति पाँति का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- बसव ने भक्ति का उपदेश दिया और इस भक्ति की साधना में वैदिक कर्मकांड , मूर्तिपूजा, जाति पाँति का भेदभाव, अवतारवाद, अंधश्रद्धा आदि को बाधक ठहराया।
- भारतीय गणतंत्र में जातियाँ हुईं अवैध , क्यों फिर बढ़ता जा रहा जाति पाँति का भेद?जातियाँ हुईं अवैध, वैध है आरक्षण,जाति पाँति के भेद भाव का करता रक्षण।
- इसी प्रकार बालकों के क्षोभ के यह वचन देखिए - खेलत में को काको गोसैयाँ ? जाति पाँति हम तें कछु नाहिं, न बसत तुम्हारी छैयाँ ।
- इसी प्रकार बालकों के क्षोभ के यह वचन देखिए - खेलत में को काको गोसैयाँ ? जाति पाँति हम तें कछु नाहिं, न बसत तुम्हारी छैयाँ ।
- भले ही हम अन्य कार्यों में जाति का भेदभाव ना मानते हो और जाति पाँति को न मानने का दंभ भरते हो परन्तु चुनाव के एन टाइम हम जाति धर्म के नाम पर वोट डाल आते है।
- जैसा आगे कहा जायगा , रामानुज की शिष्य परंपरा में होते हुए भी रामानंद जी भक्ति का एक अलग उदार मार्ग निकाल रहे थे जिसमें जाति पाँति का भेद और खानपान का आचार दूर कर दिया गया था।
- तू जो कहति ' बल ' की बेनी ज्यों ह्वैहै लाँबी मोटी इसी प्रकार बालकों के क्षोभ के ये वचन देखिए खेलत में को काको गुसैयाँ ? जाति पाँति हम तें कछु नाहीं , नाहिंन बसत तुम्हारी छैयाँ।
- तू जो कहति ' बल ' की बेनी ज्यों ह्वैहै लाँबी मोटी इसी प्रकार बालकों के क्षोभ के ये वचन देखिए खेलत में को काको गुसैयाँ ? जाति पाँति हम तें कछु नाहीं , नाहिंन बसत तुम्हारी छैयाँ।
- भावार्थ : -जो गुणों को आपका और दोषों को अपना समझता है, जिसे सब प्रकार से आपका ही भरोसा है और राम भक्त जिसे प्यारे लगते हैं, उसके हृदय में आप सीता सहित निवास कीजिए॥2॥ * जाति पाँति धनु धरमु बड़ाई।
- / जाति पाँति कुल सब मिटै, नांव धरौवो कूण॥देखा जा सकता है कि कबीर ने दूध और पानी की तरह मिलकर एक होने के परम्परागत कथन से भिन्न रले गए आटा और नमक की तरह एक होने का दर्शन पेश किया।