पंचमुख का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- पंचमुख महादेव ( चार दिशा व ऊपर की ओर ) की पूजा के लिए चार गेट है।
- पंचमुख , सप्तमुख , एकादशमुख के साथ भक्त के लिये परम रक्षक है , ये एकादश रुद्र है।
- पंचमुख हनुमान की साधना से जाने-अनजाने हुए सभी बुरे कर्म और विचारों के दोषों से छुटकारा मिलता है।
- पंचमुख हनुमान की साधना से जाने-अनजाने हुए सभी बुरे कर्म और विचारों के दोषों से छुटकारा मिलता है।
- इन्हें मां गायत्री के पंचमुख और उनकी पूजा में प्रयुक्त होने वाला पंचोपचार भी कहा जा सकता है।
- शत्रु संकट निवारण हेतु ¬ पूर्व कपि मुखाय पंचमुख हनुमते टं टं टं टं सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा।।
- पंचमुख यां पंचतत्व - शिव के पांच मुख हैं - जल , वायु , पृथ्वी , अग्नि और आकाश।
- शेष जी भी अपने सहस्र मुख से जिसका वर्णन नहीं कर सकते , शंकर जिसको अपने पंचमुख से नहीं कह सकते,चारो वेदों [
- तब प्रभु की आज्ञा पाकर हनुमानजी ने वानर , नरसिंह , गरुड , अश्व और शूकर का पंचमुख स्वरूप धारण किया।
- ओंकारेश्वर के पंचमुख गणेश : द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के महाकाल हैं तो दूसरे ओंकारेश्वर लिंग हैं।