पचरा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- मालिनी ने बिरहा , पचरा , धोबिया गीत , आल्हा आदि के गीतों को तो पेश किया ही उसी शिद्दत और समर्पण से कजरी , चैती , फगुआ गीत और शास्त्रीय शैली के लोकगीतों को भी प्रस्तुत किये।
- उत्तर दिनाजपुर : जिले के ग्वालपोखर प्रखंड की साहपुर एक नम्बर ग्राम पंचायत के पचरा गांव में 24 घंटे के भीतर डायरिया से सुनील सोरेन और मेकु सोरेन (20) नामक दो युवकों की मौत हो गयी, जबकि लगभग 50 लोग पीड़ित हैं।
- देशज शब्दों की भरमार से पूरा गाँव समेट दिया है इस तरही में कंचन ने . .. “ पैलगी , आशीष , यारी ... ” , पचरा , चैती , फा ग. .. “ , भात से निकला पसावन ... ” फेरियों की सेंदुरों की ... ” आहा हा ...
- देशज शब्दों की भरमार से पूरा गाँव समेट दिया है इस तरही में कंचन ने . .. “ पैलगी , आशीष , यारी ... ” , पचरा , चैती , फा ग. .. “ , भात से निकला पसावन ... ” फेरियों की सेंदुरों की ... ” आहा हा ...
- पचरा : - यह दुसाधों के समाज में प्रचलित पूजा गीत है | बाधा -विपत्ति दूर करने के लिये, इन्हें मन्त्रों के समान सिद्ध मान कर गाया जाता है | गीत के साथ बली देने कि प्रथा प्रचलित है | इसके गायक राहु की पूजा करते हैं | और सुअर की बलि चढाते हैं
- नवरात्रि और दशहरा वैसे तो धार्मिक मान्यताओं से भरपूर होता है इन पर्वो पर देवी गीत पचरा और भजन आदि गाने गाये जाते है जिससे माहौल और भक्तिमय होता है लेकिन विसर्जन में इसका ठीक उल्टा होता है इसमे देवी गीत और भजन तो बहुत दूर की बात है कही देशभक्ति के गीत भी नही बजते।
- माथे पर सिंदूर और कंधे पर पीला या गुलाबी गमछा लगाये निर्भीक कंठ से देवी का ' पचरा ' गाते हैं और क्षण-प्रतिक्षण साँवली होती हुई संध्या में नदी जल के भीतर ' कारन ' वारि गिराकर पता नहीं , किसकी पूजा करते हैं , दीप जलाते हैं और हमारे जैसों को चना-गुड़ का प्रसाद देते हैं।
- माथे पर सिंदूर और कंधे पर पीला या गुलाबी गमछा लगाये निर्भीक कंठ से देवी का ' पचरा ' गाते हैं और क्षण-प्रतिक्षण साँवली होती हुई संध्या में नदी जल के भीतर ' कारन ' वारि गिराकर पता नहीं , किसकी पूजा करते हैं , दीप जलाते हैं और हमारे जैसों को चना-गुड़ का प्रसाद देते हैं।
- मुहम्मद खलील एक पचरा गाते थे , 'विनयी ले शरदा भवानी/ सुनी ले तू हऊ बड़ी दानी !' आगे वह जोड़ते थे, 'माई मोरे गीतिया में अस रस भरि द जगवा के झूमे जवानी !' हमारी भी यही कामना है कि भोजपुरी गीतों की लहक और चहक में जगवा की जवानी झूमे और कि यह जो बाज़ार का घटाटोप अंधेरा है वह टूटे.
- देखो लल्लू भाई अर्रर्र माफ़ करना भइये लालू साहब , इ सब पचरा तुम भी बूझता ही होगा पर एक ठो बतिया साफ-साफ बताय दें पहिले तुम बिहार में भंइसी का सींग पकड़ के चढ़ जाता था आ चाहे जो भी आहे-माहे करता था ऊ त ठीक था, पर अब तुम हो गिया है रेल मंतरी अओर ओ भी माननीय रेलमंत्री, अब इहाँ न भंइस है न बिहार बला कादो.