पूषा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- यशवाले इन्द्र हमारा कल्याण करें; विश्ववेदाः पूषा नः स्वास्ति ( दधातु) = विश्व का
- वैदिक ज्योतिष में पूषा को रेवती नक्षत्र का देवता माना जाता है ।
- आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्॥ ॐ स्वस्ति न ऽइन्द्रो वृद्धश्रवाः , स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
- सवितृ , बृहस्पति और पूषा प्रभृति विभिन्न देवों ने इसके फलकों को सहारा दे रखा है।
- ाणी , वरुनानी, द्यौ, पृथ्वी, पूषा आदि को पहचाना गया है,और इनकी स्तुतियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
- स्वस्ति-पाठ - स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा : , स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु।
- रुद्र ने सविता की दोनों बांहें काट डालीं तथा भग की आंखें और पूषा के दांत तोड़ डाले।
- “विश्वदेव , सविता या पूषा, सोम, मरूत, चंचल पवमान, वरूण आदि सब घूम रहे हैं किसके शासन में अम्लान?
- सो , बारह सूरज गिनाए गए- इंद्र, धाता, भग, पूषा, मित्र, वरुण, अर्यमा, अंश, विवस्वत, तुस्ता, सविता और विष्णु।
- इहो सहस्रदक्षिणो यज्ञ , इह पूषा निषीदतु॥ -पा ० गृ ० सू ० १ . ८ . १ ०