फरही का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- गौर से देखा तो मालूम हुआ की प्लेट में एक तरफ कबाब और दूसरी तरफ मूढ़ी ( फरही ) रखा हुआ है.बहुत आश्चर्य हुआ के भला कबाब और मूढ़ी का कैसा मिलन है ?
- दीपू के पापा तो बेरोजगार थे , उसकी मम्मी ही दिनभर भूखी , प्यासी , अपने भूख को तीन चार कप चाय पीकर शांत करती हुई लोगों के घरों में फरही बनाती अपने परिवार की गाडी को खींच रही थी।
- इसके साथ ही चिवड़ा को भूनकर और चावल से बने मूढ़ी ( फरही ) से गुड़ की चासनी में गोल-गोल लाई बनाई जाती है , जो बच्चे ही नहीं , बुजुगॅ भी अपने थके हुए दांतों से चाव लेकर खाते हैं।
- दीपू के पापा तो बेरोजगार थे , उसकी मम् मी ही दिनभर भूखी , प् यासी , अपने भूख को तीन चार कप चाय पीकर शांत करती हुई लोगों के घरों में फरही बनाती अपने परिवार की गाडी को खींच रही थी।
- कल ही लक्खीसराय के नन्दनामा गांव से लौटा हूं मोटरसाईकिल पर एक बोरा लाद कर सब्जी इत्यादी ले गया और फिर एक रात वहां रहा , जम कर कुटुमतारे की और फिर वहां से चूड़ा , फरही का चावल मोटरसाईकिल पर लाद कर लाया।
- कल ही लक्खीसराय के नन्दनामा गांव से लौटा हूं मोटरसाईकिल पर एक बोरा लाद कर सब्जी इत्यादी ले गया और फिर एक रात वहां रहा , जम कर कुटुमतारे की और फिर वहां से चूड़ा , फरही का चावल मोटरसाईकिल पर लाद कर लाया।
- उस इतिहास की बात कभी और , पर ध्यान रहे कि जिलेबी सिर्फ़ पूजा में चढाने के लिए ही नही ख़रीदी जाती है , बल्कि गरीब और कम आमदनी वाले लोग इसे मुढी ( मुरही / फरही ) के साथ मिलाकर फांकते हुए अपना भूख भी शांत करते हैं ।
- ' क्या जरूरत थी , दीपू के मम्मी को बृहस्पतिवार को अपने घर में फरही बनाने की , लक्ष्मी सदा के लिए रूठ गयी , जमीन भी बेचना पड गया , अपनी जमीन बेचने के बाद न जाने वे किस हाल में होंगी , दीपू भी न जाने कहां भटक रहा होगा' सोंचसोंचकर उसका मन परेशान हो गया था।
- क् या जरूरत थी , दीपू के मम् मी को बृहस् पतिवार को अपने घर में फरही बनाने की , लक्ष् मी सदा के लिए रूठ गयी , जमीन भी बेचना पड गया , अपनी जमीन बेचने के बाद न जाने वे किस हाल में होंगी , दीपू भी न जाने कहां भटक रहा होगा ' सोंचसोंचकर उसका मन परेशान हो गया था।