बोह का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- एक उर्दू का मोहावरा हॆ “ख़ुदा जब हुस्न देता हॆ नज़ाकत आही जती हॆ” फिर ख़ुदा जब किसी को कमज़ोर या ताक़तवर बनादेता हॆ तो उसमें वो सारी बातें पॆदा करदी जाती हॆं के बोह सर उठा कर न चले
- एक प्यारी सी हकीकत जो इंसान ह्मेशाना सब को खुश रखने की कोशिश करता हे बोह इन्सान जो हर वक्त अपने परायों की देखभाल करता हे वोह इंसान सोर्फ़ और सिर्फ मेरी तरह अकेला और अकेला रह जाता हे ।
- उसके बूबस दबने लगा तो बोह बोलि किया बात रात रनगिन करने का इरदा है किया मेन उसकि बात सुनकेर सुन्न रेह गिया कि अभि इसके अगे 14 येअरस है ओर येह तो ? मेने हान करदि तो बोलि चलते हैन किसि होतेल मेन ।
- येह हनुमंजी है क्यूंकि हनुमंजी अमर है लंका जीतने के बाद राम जी समुंदर मे समागाए हनुमंजी आराम / तपस्या का बार मगा था इसलिए बोह आज भी है बोलो जै सिया राम मे इस मध्यम से बताना कहता हू की हिंदू जागो अपना देश बकाओ
- भारतीय नारी अगर चुपचाप चुदवा ले तो पुरुष उसे बे मज़ा समझता हे ओर अगर कुछ बोले तो बे शर्म समझाता हे इसीलिए भारतीय नारी की हर सीत्कार का अर्थ अलग अलग होता है ताकि पुरुष को पता लगता रहे कि बोह नारी को कस्ट दे रहा हे या प्यार .
- से संसार के लोगों की मौत को काबू में कर लिया है लेकिन “ पहले जमाने में बाप से पहले बेटा नहीं मरता था ” और अब बाप से पहले बेटा मर जाता है , सो अब और पहले क्या मालिक और था ? जो अब ऐसा हो जाता है और पहले ऐसा नहीं होता था परन्तु मालिक तो बोह को वहीं है।
- क्या होगा हमारी आगे आने वाली नस्लों का - आज बच्चे हिन्दी , इंग्लिश , मथ्स , फिजिक्स , केमेस्ट्री , बायो , जी के , कम्पुटर और बहुत से तो मुझे याद नही बोह सब पढ़ते है लेकिन अपना देश , अपने पूर्बज , अपनी संस्कीरती के बारे मैं न बो पढ़ते थे है न हम पढाते है क्योंकि उस से पर्सन्टेज पर फरक नही होता ।
- पूर्णिमा को टोकरियों में बोये गये दानो से उत्पन्न पौधा रूपी भोजली को महिलायें कतारबद्ध होकर मूडी में बोह कर ( सिर में रख कर) गांव के समीप स्थित नदी, नाले या तालाब में बहाने ले जाती हैं जिसे भोजली सरोना या ठंडा करना कहते हैं, इस संपूर्ण यात्रा में भोजली सिर पर रखी कुआरी लडकियां एवं नवविवाहिता नये नये वस्त्र पहने हुए भोजली गीत गाती हैं साथ ही मांदर व मजीरें की संगत भी आजकल होने लगी है ।
- सो तुमको मालूम ही है क्योंकि चौरासी लाख कुण्डियों के उपर चौरासी लाख जीवाजून को ऐसे दुख देते हैं जिससे बोह बेहोश होकर अपने जीव को भूल जाते हैं , सो यह बनिये ऐसे- 2 जुलम करके जीवाजून को सजा देते हैं जिससे ऐसे- 2 सुपने होते हैं सो जबकि बियों के राक्षसी पाप की साया संसार के लोगों पर पड़ता है जब संसार को ऐसे जुलम के सुपने होते है , कि जो दिन की रात सुझती है और रात का दिन सुझता है।
- जागरण संवाद केंद्र , अंबाला: छावनी के वार हीरोज स्टेडियम में चल रही तीन दिवसीय ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता बुधवार को संपन्न हो गई। डीईपी रमनजीत सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में कबड्डी अंडर-19 आयु वर्ग में राजकीय स्कूल पंजोखरा ने पहला स्थान हासिल किया जबकि राजकीय स्कूल बीसी बाजार की टीम द्वितीय रही। खो-खो अंडर-19 आयु वर्ग में राजकीय स्कूल बोह ने बाजी मारी तथा एनसीसी मॉडल स्कूल द्वितीय रहा। बास्केटबाल अंडर-14,17 एवं अंडर-19 आयु वर्ग में एपीएस की टीम ने बाजी मारी। जबकि तीनों