मिचली आना का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- फर्क हो सकतें हैं दिल के दौरों के लक्षण औरतों में : ज़रूरी नहीं है सीने के बीच से स्टर्नम से उठके दर्द की लहर बाजू से होती ऊंगलियों तक ही आये औरतों के मामले में कमर में दर्द का होना , जबड़े में दर्द होना , मिचली आना , उदर शूल , नौज़िया नान टिपिकल लक्षण हो सकतें है दिल के दौरे के .
- 5 ) पाचन सम्बन्धी समस्याएँ -लगातार बैठे रहने के कारण खाना ठीक से हजम नहीं हो पता है जिसके कारण कई प्रकार की समस्याएँ खड़ी हो जाती है जैसे , पेट फूलना , डकारे आना , उल्टी होना या मिचली आना , मुहं में खट्टा पानी आना , खाते ही पेट में दर्द या भारीपन होना , पेट या सीने में जलन होना , कभी दस्त और कभी कब्ज होना आदि लक्षण रहते है .
- जब मानव शरीर की पाचन क्रिया बिगड़ जाती है , अर्थात् जो भोजन हम करते हैं, वह सही ढंग से न पचना, आंतों में फंसा रह जाना, जिसकी वजह से गैस बनना, पेट में दर्द रहना, मिचली आना, शौच जाने में समय लगना एवं नित्य पेट साफ न होना, दिन में तीन चार बार शौच जाना, पेट गुडगुडा़ना, बदबूदार गैस निकलना और खट्टी डकारें आना आदि अनेकों परेशानियां पैदा हो जाती हैं, जिससे नये-नये रोगों की उत्पत्ति होती है।
- रोगी की नाड़ी भारी होना , कड़ी तथा तेज होना , जीभ पीली हो जाना तथा उसके बीच के भाग में लाल रेखा होना , शरीर में तेज कंपकंपी होना , चक्कर आना , सिर में दर्द होना , शारीरिक कमजोरी अधिक होना तथा मिचली आना आदि लक्षण अविराम ज्वर से पीड़ित रोगी में है तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए विरेट्र-विरिडि औषधि की 1 x मात्रा का उपयोग करने से रोग ठीक हो जाता है।
- हैजा रोग होने के शुरू होने पर मिचली आना , उबकाई या उल्टी आना , दस्त की अपेक्षा उल्टी अधिक आना , हरे रंग के फेन भरे बदबूदार या आंव और रक्त-मिले दस्त आना , मलत्याग करने के समय में आमाशय रोग की तरह तेज वेग से दस्त होना और पेट में मरोड़ तथा ऐंठन होना आदि लक्षण रोग में दिखाई दें तो ऐसी अवस्था में रोग को ठीक करने के लिए इपिकाक औषधि की 3 x मात्रा या 6 शक्ति का उपयोग किया जा सकता है।