शरासन का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- मेरा यह अनिवार्य शरासन पाँच कुसुम सायक धारी ; अभी बना लेवे तत्क्षण ही उसको निज आज्ञाकारी द्विवेदीजी की कविताओं का संग्रह ' काव्यमंजूषा ' नाम की पुस्तक में हुआ है।
- “किन्तु , हाय, जिस दिन बोया गया युद्ध-बीज, साथ दिया मेर नहीं मेरे दिव्य ज्ञान ने; उलट दी मति मेरी भीम की गदा ने और पार्थ के शरासन ने, अपनी कृपान ने;
- हैं नहीं शरासन आज हस्त तूणीर स्कन्ध वह नहीं सोहता निविड़-जटा-दृढ़-मुकुट-बन्ध , सुन पड़ता सिंहनाद,-रण कोलाहल अपार, उमड़ता नहीं मन, स्तब्ध सुधी हैं ध्यान धार, पूजोपरान्त जपते दुर्गा, दशभुजा नाम, मन करते हुए मनन नामों के गुणग्राम, बीता वह दिवस, हुआ मन स्थिर इष्ट के चरण गहन-से-गहनतर होने लगा समाराधन।
- हैं नहीं शरासन आज हस्त तूणीर स्कन्ध वह नहीं सोहता निबिड़ जटा दृढ़ मुकुटबन्ध , सुन पड़ता सिंहनाद रण कोलाहल अपार, उमड़ता नहीं मन, स्तब्ध सुधी हैं ध्यान धार, पूजोपरान्त जपते दुर्गा, दशभुजा नाम, मन करते हुए मनन नामों के गुणग्राम, बीता वह दिवस, हुआ मन स्थिर इष्ट के चरण गहन से गहनतर होने लगा समाराधन।
- हैं नहीं शरासन आज हस्त-तूणीर स्कन्ध वह नहीं सोहता निबिड़-जटा-दृढ़ मुकुट-वन्ध ; सुन पड़ता सिंहनाद रण-कोलाहल अपार , उमड़ता नहीं मन , स्तब्ध सुधी हैं ध्यान धार ; पूजोपरान्त जपते दुर्गा , दशभुजा नाम , मन करते मनन नामों के गुणग्राम ; बीता वह दिवस , हुआ मन स्थिर इष्ट के चरण गहन से गहनतर होने लगा समाराधन।
- आइए इस लम्बी कविता के अंतिम हिस्से को एक बार पढ़ें , देखें और अपने भीतर के कलुष को टटोलें और उस पर विजय प्राप्त करने की सोचें ! प्रस्तुत है निराला जी की कविता ' राम की शक्ति पूजा' का अंतिम अंश - हैं नहीं शरासन आज हस्त तूणीर स्कन्ध वह नहीं सोहता निविड़ जटा दृढ़ मुकुटबन्ध, सुन पड़ता सिंहनाद रण कोलाहल अपार, उमड़ता नहीं मन, स्तब्ध सुधी हैं ध्यान धार, पूजोपरान्त जपते दुर्गा, दशभुजा नाम, मन करते हुए मनन नामों के गुणग्राम, बीता वह दिवस, हुआ मन स्थिर इष्ट के चरण गहन से गहनतर होने लगा समाराधन।