संचित कर्म का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इंसान के संचित कर्म प्रारब्ध रूप होकर उसको सुख दुख देते हैं ।
- मृत्यु के बाद सूक्ष्म लोक में यही संचित कर्म हमारी पहचान होते हैं।
- उनके अनुसार बीत चुके समय या पिछले जन्मों के कर्म संचित कर्म हैं।
- कर्मों की तीन श्रेणियां कही गई हैं- संचित कर्म , क्रियामाण कर्म और प्रारब्ध।
- प्रश्न : संचित कर्म क्या है ? इनके होते, मुक्ति कैसे हो ? पॉल(33), अमेरिका।
- प्रश्न : संचित कर्म क्या है ? इनके होते, मुक्ति कैसे हो ? पॉल(33), अमेरिका।
- agoप्रारब्ध और संचित कर्म के बारे मे बताएं ? इस बारे में आपका क्या विचार है?
- और संजय गुलाटी का ज्योतिष परिचय ( संचित कर्म जीवन में मिलने वाले दोराहे हैं)।
- इन कर्मों को करते हुए हम पुनः संचित कर्म एकत्र करते जाते हैं .
- ' ' जन्म-जन्मान्तर के संचित कर्म फल ( प्रारब्ध को ) भुलाना ही मृत्यु है।