सकुची का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- क्या हुआ ? अगली बार से ध्यान रखिएगा :) यह रही आपकी पेशकश: कुदरत ने देखो पत्तों को है एक नया परिधान दिया दुल्हन जैसे करके श्रृंगार सकुची शरमाई है क्या पतझड़ आया है?
- पहले मिलती मुस्काती थी , हंसकर मेरे पास आती थी, अब सकुची सी बैठी है, जो फूलों सी खिल जाती थी, आखिर उसकी खामोशी में ना जाने क्या राज़ है वो मुझसे नाराज़ है।
- उधर , छुटकी भौजी वय:संधि की दहलीज पर खड़ी ननद को छेड़ रही हैं-‘क्यूं री! सूपनखा, गुठली पे गूदा चढ़ गइल औ इहां बौरौ नाही फरा ?' कली सी सकुची ननद जी धत्त…! कहकर लजाती भागीं…बाहर बाबा खखारे…भीतर चुप्पी …फिर ठट्ठा।
- सकुची सलोनी सुकुमार नार , हा ये लाज आज ब्रिजराजा मेरे काज इत कीनो है ! ) ” राधा के गोरे गोरे गाल , उस पे मोहन ने मल्यो गुलाल , हो , मोहन मुरली वाले ने , राधे , रंग में रंग डारी ! राधे रंग में रंग डारी .............................................
- बहरहाल डोली में चढ़ कर घर से एक बार विदा हो चुकने के बाद दुबारे उसने प्रवेश किया था सहमी सकुची लता बन कर , पर देखते देखते ( असल में बिना किसी को दिखाई दिये ) उसने विक्रमगंज वाली और 11 अप्रैल 1954 को आँगन के एक एक कोने में सलटा दिया और अपने शाख प्रशाख फैला कर घर में सपति ससंतान शोभा पाने लगी।