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साख्य का अर्थ

साख्य अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. पर एक साख्य दर्शन भी हुआ करता था हिन्दू धर्म में उसे ब्राह्मणों ने किस कारण अछूत कर रखा है उसका कारण आप बताएंगी ? क्या सिर्फ इसलिए की वह निरीश्वर वादी दर्शन था ..
  2. “ मैत्री साख्य प्रेम इनका विकास धीरे धीरे होता है ऐसा हम मानते हैं , ' प्रथम दर्शन से ही प्रेम ' की संभावना स्वीकार कर लेने से भी इसमें कोई अंतर नही आता ”
  3. छठ व्रत चुकी पौरिहित्य से मुक्त है , इश्वर और उपासक के बीच सीधा सम्बन्ध स्थापित करता है , इसलिए व्रत करती स्त्रियाँ इसके वातावरण को अपने स्वभाव के अनुकूल साख्य और साहचर्य का वातावरण बना देती हैं .
  4. न्यायालय में दी गई साक्ष्य में विकास अधिकारी पी . डब्ल्यू. 6 दशरथसिंह ने अपनी साख्य में अब्दुल हमीद द्वारा एम बी संख्य 39 के पेज संख्या 49 प्रदर्श पी. 5 को प्रदर्श कराया हैं तथा इसमें सांकला द्वारा प्लीन्थ लेवल तक का कार्य करना दिखाया गया हैं।
  5. सिमरथाराम ने अपनी साख्य में इस बात का अनुमोदन किया कि दिनांक 12 . 9.2003 को उसने लीलाराम से टेलीफोन पर वार्ता की तो लीलाराम ने बताया कि पटवारी दिनांक 11-3-2003 को उसके कुए पर आकर म्यूटशन भरने के पॉच हजार रूपये मांग गया था जो उसने बहाना बनाकर टाल दिया तथा दिनांक 13-9-2003 को पटवारी ने उसे वापस पटवारघर बुलाया।
  6. यद्यपि पुष्टिमार्ग में रागानुगा भक्ति की उस प्रकार की विवेचना नहीं मिलती , जैसी गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के ' भक्तिरसामृतसिन्धु ' और उज्ज्वलनीलमणि ' आदि ग्रन्थों में मिलती है , फिर भी इस सम्प्रदाय की भक्ति-पद्धति और अनुयायी कवियों की , विशेष रूप से सूरदास की कृतियों कसे यह स्पष्ट प्रमाणित हो जाता है कि पुष्टिमार्ग में भी दास्य , वात्सल्य , साख्य और माधुर्य , चारों प्रकार की रति भक्ति-पद्धति में समाविष्ट है तथा भावावेश और घनिष्ठता की दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्व माधुर्य भाव की कान्तारति का ही है , जिसकी आदर्श स्वयं स्वामिनी राधा जी हैं।
  7. यद्यपि पुष्टिमार्ग में रागानुगा भक्ति की उस प्रकार की विवेचना नहीं मिलती , जैसी गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के ' भक्तिरसामृतसिन्धु ' और उज्ज्वलनीलमणि ' आदि ग्रन्थों में मिलती है , फिर भी इस सम्प्रदाय की भक्ति-पद्धति और अनुयायी कवियों की , विशेष रूप से सूरदास की कृतियों कसे यह स्पष्ट प्रमाणित हो जाता है कि पुष्टिमार्ग में भी दास्य , वात्सल्य , साख्य और माधुर्य , चारों प्रकार की रति भक्ति-पद्धति में समाविष्ट है तथा भावावेश और घनिष्ठता की दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्व माधुर्य भाव की कान्तारति का ही है , जिसकी आदर्श स्वयं स्वामिनी राधा जी हैं।
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