सोनजुही का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- आज उन्हें देखकर शंकर के संबंध में कालिदास की उक्ति स्मृति में कौंध गयी : ‘ न विश्क्मूर्तेरवधार्यते वपूः ' ! इस घड़ी वह एक गाढ़े की लुंगी और उसी कपड़े की एक आधी बांह की गंजी जिससे रुद्राक्ष झांकता हुआ-सा और काठ की चट्टी पहने हुए गुलाब , सोनजुही , बेला , रजनीगंधा और मुकुलित मालती के कुंज में सिंचाईं के झरने के साथ विचर रहे थे।
- आख़िरी वाले दो अशआर के सानी मिसरे बानी साहब के हैं सुख चमेली की लड़ी हो जैसे ग़म कोई सोनजुही हो जैसे हमने हर पीर समझनी थी यूँ गर्द , शबनम को मिली हो जैसे ज़िंदगी इस के सिवा है भी क्या धूप, सायों से दबी हो जैसे आस है या कि सफ़र की तालिब नाव, साहिल पे खड़ी हो जैसे सफ़र की तालिब - यात्रा पर जाने की इच्छुक सब का कहना'