अकंप का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- कितना ही हम अज्ञान में भटकें और अंधेरे में जाएं और कितने ही पापों में उतरें और नर्कों की यात्रा करें , भीतर के प्रकाश में कोई अंतर नहीं पड़ता , अकंप है।
- जैसे कोई दीया जलता हो , ऐसे स्थान में जहा वायु का कोई झोंका न आए , निर्वात भवन में दीया जलता हो , कोई कैप न उठता हो ; लहर न उठती हो , ज्योति अकंप हो।
- जिसने भीतर की ज्योति को जगा लिया जिसने जीवन के नियम को पहचान लिया ; जिसने जागने में थोड़ी सी स्थिति सम्हाल ली जिसकी लौ अकंप जलने लगी , अब हिलती नहीं , डुलती नहीं , डावाडोल नहीं होती।
- वही जीव , जीवित रहता जिस बल से , आत्म - दीप , प्रकाशित , जिस का वरदान वही महा तेज पुंज , जो सब का प्राण ! ****************************** श्रधा सुमन अर्पित हैं इस अकंप जलते दीप रूपी मेजर सूरी नाम के एक वीर , को !
- संघर्ष से हर्ष की तलाश में अडिग- अकंप रहे आपके इस सफरनामा के कथानायक कीजगतमाता को नमन करता हूँ मैं . माँ के त्याग की महिमा वैसे भी शब्दातीत है .हमारी गुज़ारिश का आपने रखा ख्याल किस्सा विमल जी का रखिएगा बहालकि इसमें जोश है और जश्न भी है, इसमें उत्तर हैं और प्रश्न भी हैं !
- रक्ताभ आकाश की छाती चीरकर परिंदों की टोलियाँ जब सौंदर्य की उपासना का संगीत गुनगुनाती हैं और कुम्हलाई कल्पना को टेर कर नीहारिका की श्वेतिमा जब अंतस की वीरान वीथियों में प्रेमगीत गाती हैं तब बादलों से छानकर आनेवाली नीली- काली चांदनी के प्रेम की अकंप धारा में डूब कर मैंने एक कविता लिखी है . ......
- ओशोदुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक
- ओशोदुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक...
- दुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक होना है !
- नचिकेता जैसी सरलता , नचिकेता जैसी निर्दोष श्रद्धा ; नचिकेता जैसी अडिग , अकंप खोज की आकांक्षा , अभीप्सा ; क्षुद्र प्रलोभन से न डावाडोल हो जाना ; सारा संसार भी मिलता हो , तो भी दांव पर लगा देने की क्षमता ; धैर्य - अगर ये सब आपके जीवन में थोड़े - से भी उतर आएं , तो जो नचिकेता को हुआ है , वही आपको भी हो सकता है।