अकाम का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अकाम निर्जरा - अपनी इच्छा के बिना इन्द्रिय-विषयों का त्याग करने पर तथा परवश होकर भोग - उपभोग का निरोध होने पर उसे शान्ति से सह लेना , इससे जो कर्मों की निर्जरा होती है उसे अकाम निर्जरा कहते हैं।
- यह अकाम आनन्द भाग संतुष्ट-शांत उस जन का , जिसके सम्मुख फलासक्तिमय कोई ध्येय नहीं है, जो अविरत तन्मय निसर्ग से, एकाकार प्रकृति से, बहता रहता मुदित, पूर्ण, निष्काम कर्म-धारा में, संघर्षॉ में निरत, विरत, पर, उनके परिणामॉ से; सदा मानते हुए, यहाँ जो कुछ है, मात्र क्रिया है;
- गोपी ने कहा , “क्या मैंने आपको 2010 में नहीं बताया था कि मेरा बेहतरीन आना अभी बाकी है और देखिए टेलीविजन शो 'निंगालक्कुम अकाम कोडीश्वरन' के दूसरे संस्करण से मैंने शुरुआत की है, अगले महीने शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तीसरे संस्करण के बारे में भी मुझसे पूछा गया है।”
- जानें , क्यॉ तैराक चतुर तब भी प्रशांत धारा में चला-चलाकर हाथ-पाँव विक्षोभ व्यर्थ भरते हैं ! कौन सिद्धि है जो मिलती संतरण-दक्ष साधक को , और नहीं मिलती अकाम जल में बहने वाले को ? जिसे खिजता फिरता है तू , वह अरूप , अनिकेतन किसी व्योम पर कहीं देह धर बैठा नहीं मिलेगा .
- चुपके से खबर लेता शुभ लक्षणों को देख अपनी ही आँखों का स्पर्श करता है क्या आसान होगा अनंत काल तक अजनबी धुरी के सहारे चलना सीधे-सीधे देखना कहीं कुछ भी अनैतिक नहीं शब्दों के धोकों के साथ पकडे जाने का डर आखिर विधियों के सहारे कैसे जिया जा सकता और कैसे पाया जा सकता उस अकाम अवस्था में
- यह अकाम आनन्द भाग संतुष्ट-शांत उस जन का , जिसके सम्मुख फलासक्तिमय कोई ध्येय नहीं है , जो अविरत तन्मय निसर्ग से , एकाकार प्रकृति से , बहता रहता मुदित , पूर्ण , निष्काम कर्म-धारा में , संघर्षॉ में निरत , विरत , पर , उनके परिणामॉ से ; सदा मानते हुए , यहाँ जो कुछ है , मात्र क्रिया है ;
- यह अकाम आनन्द भाग उनका , जो नहीं सुखॉ को आमंत्रण भेजते , न जगकर पथ जोहा करते हैं ; न तो बुद्धि जिनकी चिंताकुल यह सोचा करती है , कैसे , क्या कुछ करें कि हो सुख पर अधिकार हमारा ; और न तो चेतना आकुलित इस भय से रहती है , जानें , कौन दुख आ जाए कब , किस वातायन से ;