अजमाइश का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- सरकार को जहाँ जोर दिखाना चहिये वहां तो दिखाती नहीं और देश की भलाई के लिए किये जा रहे आन्दोलन को जोर अजमाइश से दबाना चाहती है . .
- इस लिहाज से ये कहा जा सकता कि इस बार भी सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक जोर अजमाइश की बेहतरीन कुश्ती देश के राजनैतिक अखाड़े अर्थात हमारी संसद में देखने को मिलेगी .
- हिन्दी गजलों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है बहुत से प्रख्यात गीतकार , कथाकार, निबंधकार यहाँ तक की कविता (अतुकांत) के लोग भी इस विधा से जोर अजमाइश करते नज़र आए ।
- हमारे वरिष्ठ विद्वत जन , जो साहित्य के पुरोधा हैं , अपनी लेखनी से अनेक विधाओं को तराश ही रहे हैं , युवा / नवीन साहित्यकारों की भी लेखनी अजमाइश में पीछे नहीं है और सफल भी हो रहे हैं।
- भारत शर्मा शिवराज के मंत्रियों को हराने में जुटा संघ नई दिल्ली ! तीसरी बार सत्ता में पहुंचने के लिए जोर अजमाइश करने के लिए मेहनत कर रहे शिवराज सिंह के मंत्रियों व विधायकों से संघ परिवार नाराज चल रहा है।
- निखिल जी नमस्कार लोकतंत्र के हत्यारों को सबक सिखाना जरुरी है … बिलकुल सही कहा अपने …… . सरकार को जहाँ जोर दिखाना चहिये वहां तो दिखाती नहीं और देश की भलाई के लिए किये जा रहे आन्दोलन को जोर अजमाइश से दबाना चाहती है ..
- शाद साब को निर्मोही काल चक्र ने सन 1928 से 1969 अर्थात मात्र 41 बहारों का समय ही दिया और वे बहारें भी काँटों द्वारा अहसास अजमाइश के सिवा कुछ नहीं थ॥ बहुत उदासी , दर्द और शराब के ज़हर में डूब कर इस लोकप्रिय और हर दिल अज़ीज़ शायर ने दुनिया से मुँह मोड़ लिया।
- पर साहब ज्यादा खुश-फहमियाँ न पालें और लौट आयें जमीं पर | जिस सूचना क्रांति को लेकर अभी - अभी आप कल्पना के समुद्र में एक गोता लगा आयें हैं उसे ही प्रयोग करके कुछ कलंदर टाइप के लोग इसे सूचना जनित फ्राड क्रान्ति की शक्ल देने में निरंतर जोर अजमाइश कर रहें है |
- शाद साब को निर्मोही काल चक्र ने सन 1928 से 1969 अर्थात मात्र 41 बहारों का समय ही दिया और वे बहारें भी काँटों द्वारा अहसास अजमाइश के सिवा कुछ नहीं थ॥ बहुत उदासी , दर्द और शराब के ज़हर में डूब कर इस लोकप्रिय और हर दिल अज़ीज़ शायर ने दुनिया से मुँह मोड़ लिया।
- और चलती रहती है खींचतान और अजमाइश ताकतों की कि तभी बीच में खड़ा होता है कोई कला साधक जो बनाता है रास्ता , कहीं बीच का कला के कद्रदान देना शुरू करते हैं अनुदान जिससे चल पड़ती है दुकान जहाँ , अमीर गरीब सुन्दर बदसूरत स्त्री-पुरुष लिंग-अतीत आयोजकों से साधते हैं संपर्क पुरानी सड़कों की मरम्मत भी होती है नए रंग रोगन भी लगते हैं इस तरह शुरू होता है सिलसिला खुशहाली का निम्न मध्य वर्ग के शिक्षित -कुंठित मर्द ऐन मौके पर उठाता है मुद्दा नैतिकता का , मानव मूल्य के पतन का। .......