अनृत का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अनृत अर्थात् अपनी जानकारी से विपरीत बोलनाः हम जो जानते हैं वह न बोलें , मौन रहें तो चल सकता है किन्तु जो बोलें वह सत्य ही होना चाहिए , अपने ज्ञान के अनुसार ही होना चाहिए।
- इससे ज्ञात होता है ‘ अ ' का अन विपरीतार्थक उपसर्ग तो संस्कृत से गया ही है शब्द भी संस्कृत मूलक है , और देखिए संस्कृत का ऋत और अनृत अंग्रेजी के truth और Untruth के समानार्थक है।
- वैसे तो तुलसी बाबा ने तो राम चरित मानस में प्रत्येक औरत के बारे में कहा है कि- “ अवगुण आठ सदा उर रहई . नाथ पुराण निगम अस कहई . साहस , अनृत , चपलता , माया .
- वैसे तो तुलसी बाबा ने तो राम चरित मानस में प्रत्येक औरत के बारे में कहा है कि- “ अवगुण आठ सदा उर रहई . नाथ पुराण निगम अस कहई . साहस , अनृत , चपलता , माया .
- चार्वाकपंथियों के मतानुसार स्वयं को वेदज्ञ कहने - समझने वाले धूर्त बगुला - भगतों ने आपस में ही वेदों को अनृत ( झूठा ) , व्याघातपूर्ण ( परस्पर विरोधी ) तथा पुनरुक्त ( दुहराव ) दोषों से प्रदूषित किया है .
- लेकिन बड़े ताज्जुब क़ी बात है कि आप अपनी ही बात क्यों भूल गये ? “ अवगुण आठ सदा उर रहई . नाथ पुराण निगम अस कहई . साहस , अनृत , चपलता , माया . भय , अविवेक , अशौच , अदाया . ”
- लेकिन बड़े ताज्जुब क़ी बात है कि आप अपनी ही बात क्यों भूल गये ? “ अवगुण आठ सदा उर रहई . नाथ पुराण निगम अस कहई . साहस , अनृत , चपलता , माया . भय , अविवेक , अशौच , अदाया . ”
- धोखे या अनृत प्रस्तुतीकरण द्वारा यदि किसी पक्ष की सहमति प्राप्त की गई हो , तो वह पक्ष, यदि ठीक समझे, ठीके को पूरा करवा सकता है और उन सब माँगों को पेश कर सकता है जिनका वह अधिकारी होता, यदि प्रस्तुतीकरण ठीक होता; किंतु अपनी सामान्य बुद्धि से वास्तविकता को जान सकने की स्थिति में होते हुए सहमति देनेवाला पक्ष ठीके को रद्द नहीं करवा सकता।
- धोखे या अनृत प्रस्तुतीकरण द्वारा यदि किसी पक्ष की सहमति प्राप्त की गई हो , तो वह पक्ष, यदि ठीक समझे, ठीके को पूरा करवा सकता है और उन सब माँगों को पेश कर सकता है जिनका वह अधिकारी होता, यदि प्रस्तुतीकरण ठीक होता; किंतु अपनी सामान्य बुद्धि से वास्तविकता को जान सकने की स्थिति में होते हुए सहमति देनेवाला पक्ष ठीके को रद्द नहीं करवा सकता।