अपलाप का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- धर्म का यह अपलाप देखने को आता है , इसलिए संस्कृति शब्द का सहारा यदि लिया जाएऔर अपनी अन्तस्थ सहानुभूति का उत्तरोत्तर विस्तार साधते चला जाए, तो यह युक्तही है.
- इस प्रकार सूक्ष्मशरीर के अस्तित्व में ही भोग होने से -एक की विद्यमानता में ही भोग होता है , दूसरे की विद्यमानता में नहीं होता- इस मान्यता में प्रत्यक्ष के अपलाप का दोष आयेगा।
- ' ' ' अनुमान को न मानने पर व्यवहार की अनुपपत्ति का वारण '' ' चार्वाक यदि अनुमान प्रमाण नहीं मानेगा तो धूम को देख कर आग को जानने की प्रवृत्ति का अपलाप होने लगेगा।
- संस्कृत का विद्वान भी न तो गोविन्दप्रसाद को गोविन्दप्प्रसाद कहेगा न शिवप्रसाद को शिवप्प्रसाद , क्योंकि सर्वसाधारण के उच्चारण का न तो वह अपलाप कर सकता है , न बोलचाल की भाषा से अनभिज्ञ बनकर उपहास-भाजन बन सकता है।
- उनका तर्क है कि ' जब अनुभव के आधार पर सुखविरोधी क्रोध, शोक, भय आदि स्थायी भावों का रसत्व को प्राप्त होना मान लिया गया है तो फिर सहस्त्रगुणित अनुभव सिद्ध भक्ति को रस न मानना अपलाप है, जड़ता है।
- यद्यपि आचार्य शंकर का काल नागार्जुन से बहुत बाद का है , फिर भी नागार्जुन के समय औपनिषदिक धारा के अस्तित्व का अपलाप नहीं किया जा सकता , किन्तु उसकी व्याख्या आचार्य शंकर की व्याख्या से निश्चित ही भिन्न रही होगी।
- स्वभावत : सत् नहीं होने पर भी वस्तु का अपलाप नहीं किया जाता , अपितु इसका सापेक्ष या नि : स्वभाव अस्तित्व स्वीकार किया जाता है और उसी के आधार पर कार्य-कारण , बन्ध-मोक्ष आदि सारी व्यवस्थाएं सुचारुतया सम्पन्न होती हैं।
- श्री रामचन्द्रजी ने कहाः भगवन् , हे सर्वधर्मज्ञ , जो प्राक्तन कर्म है वही दैव है , ऐसा आपने बार बार कहा , फिर दैव है ही नहीं , इस प्रकार उसका आप अपलाप कैसे करते हैं यानी उसके अपलाप करने में आपका क्या अभिप्राय है ? ।।
- श्री रामचन्द्रजी ने कहाः भगवन् , हे सर्वधर्मज्ञ , जो प्राक्तन कर्म है वही दैव है , ऐसा आपने बार बार कहा , फिर दैव है ही नहीं , इस प्रकार उसका आप अपलाप कैसे करते हैं यानी उसके अपलाप करने में आपका क्या अभिप्राय है ? ।।
- कान्हा , राधा से क्यों रूठे “ मिल जाए कहीं कान खींच कर कह दूं ...”कान्हा , अब ना चलने की है रे तेरी चतुराई!” समझाया मन को .... फर्क है कृष्ण में , आम इंसान में ...बहुत फर्क है ! ब्लॉग दुनिया में लौटे फिर से ...देखा तो गिरिजेश जी अपलाप कर रहे हैं ....