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अर्य का अर्थ

अर्य अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. पिछले साल छठ पर्व के दौरान उगते हुए सूर्य को अर्य देने के बाद मची भगदड़ में कई बच्चों और महिला समेत 17 लोगों की मौत हो गयी थी और कई अन्य जख्मी हो गए थे।
  2. - अशोक कुमार ‘ आलोक ' संपादक- ' अर्य संदेश ' , मोबाइल- 9709496944 . लेखक - जवाहर किशोर प्रसाद संपर्कः माधुरी प्रकाशन , सिपाही टोला , चूनापुर रोड , पूणिया - 854301 मोबाइल- 9905217237 / 9973264550 .
  3. - अशोक कुमार ‘ आलोक ' संपादक- ' अर्य संदेश ' , मोबाइल- 9709496944 . लेखक - जवाहर किशोर प्रसाद संपर्कः माधुरी प्रकाशन , सिपाही टोला , चूनापुर रोड , पूणिया - 854301 मोबाइल- 9905217237 / 9973264550 .
  4. प्रश्न ( 1 ) पर डा 0 अम्बेडकर पाश्चात्य विचारकों प्रो 0 रिप्ले और प्रो 0 मैक्समूलर के मतों पर विचार करते हुए अपना मंत्वय इन दोनो का खण्डन करते हुए रखते हैं - ऋग्वेद में दो शब्द आए हैं एक अर्य , दूसरा आर्य।
  5. अर्य शब्द 88 बार प्रयोग हुआ है और इसका अर्थ है - ( 1 ) शत्रु के अर्थ में ( 2 ) सम्मनीय व्यक्ति के अर्थ में ( 3 ) भारत के नाम के रूप में ( 4 ) स्वामी वैश्य अथवा नागरिक के रूप में।
  6. प्रेमचंदके समय की महत्वपूर्ण घटनाएँ , चाहे प्रथम विश्व-युद्व हो, गांधी का आगमन, नमक सत्याग्रह, जालियांवालाकांड, असहयोग आंदोलन हो या इसी तरह की कोईअन्य घटनाएँ हों, वे राजनैतिकद़्अष्टि से भिन्न अर्य भले ही रखती हों मानवीयद़्अष्टि ने उनका जो अर्थहै, वह भी प्रेमचंद की रचनाओं में मिलता हैं.
  7. भोजपुर की धरती से जहाँ मित्र , जनपथ, देशज, रू और अभी-अभी सृजन लोक सदृश्य पत्रिकाएँ राष्ट्र की साहित्यिक क्षितिज पर अपनी जोरदार उपस्थिति के साथ डटी है, वहीं पूर्णिया अंचल से प्रकाशित - कला, मुहिम, संवदिया, परती-पलार, वर्तिका, हमसब, अर्य संदेश, लक्ष्य आदि पत्रिकाओं के साथ 'साँवली' का आगाज शुभ संकेत है, बिहार की समकालीन रचनात्मकता के लिए।
  8. भोजपुर की धरती से जहाँ मित्र , जनपथ, देशज, रू और अभी-अभी सृजन लोक सदृश्य पत्रिकाएँ राष्ट्र की साहित्यिक क्षितिज पर अपनी जोरदार उपस्थिति के साथ डटी है, वहीं पूर्णिया अंचल से प्रकाशित - कला, मुहिम, संवदिया, परती-पलार, वर्तिका, हमसब, अर्य संदेश, लक्ष्य आदि पत्रिकाओं के साथ ‘साँवली' का आगाज शुभ संकेत है, बिहार की समकालीन रचनात्मकता के लिए।
  9. भोजपुर की धरती से जहाँ मित्र , जनपथ , देशज , रू और अभी-अभी सृजन लोक सदृश्य पत्रिकाएँ राष्ट्र की साहित्यिक क्षितिज पर अपनी जोरदार उपस्थिति के साथ डटी है , वहीं पूर्णिया अंचल से प्रकाशित - कला , मुहिम , संवदिया , परती-पलार , वर्तिका , हमसब , अर्य संदेश , लक्ष्य आदि पत्रिकाओं के साथ ‘ साँवली ' का आगाज शुभ संकेत है , बिहार की समकालीन रचनात्मकता के लिए।
  10. भोजपुर की धरती से जहाँ मित्र , जनपथ , देशज , रू और अभी-अभी सृजन लोक सदृश्य पत्रिकाएँ राष्ट्र की साहित्यिक क्षितिज पर अपनी जोरदार उपस्थिति के साथ डटी है , वहीं पूर्णिया अंचल से प्रकाशित - कला , मुहिम , संवदिया , परती-पलार , वर्तिका , हमसब , अर्य संदेश , लक्ष्य आदि पत्रिकाओं के साथ ‘ साँवली ' का आगाज शुभ संकेत है , बिहार की समकालीन रचनात्मकता के लिए।
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