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आदिग्रन्थ का अर्थ

आदिग्रन्थ अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. आदिग्रन्थ अथवा गुरुग्रंथ साहब , आज सिखों का परम-पूज्य धर्मग्रन्थ उसी प्रकार स्वीकार किया जाता है जैसे विभिन्न धर्म समुदायों द्वारा वेद, गीता, बाइबिल और कुरआन को स्वीकार किया जाता है।
  2. सिख धर्म के पाँचवें गुरू अर्जुन देव ने आदिग्रन्थ की रचना की जिसमें सिक्खों के गुरू तथा हिन्दू व मुसलामन सन्तों की वाणियों को संकलित किया गया है , यह ग्रन्थ धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।
  3. शेख़ खरीद , जयदेव, त्रिलोचन, सधना, नामदेव, वेणी, रामानन्द, कबीर, रविदास, पीपा, सैठा, धन्ना, भीखन, परमानन्द और सूरदास 15 संतों की वाणी को आदिग्रन्थ में संग्रहीत करके गुरुजी ने अपनी उदार मानवतावादी दृष्टि का परिचय दिया।
  4. इस रचना में आदिग्रन्थ के सम्पादन की पृष्ठभूमि के साथ ही ऐसे सन्तों की पहचान , उनकी पृष्ठभूमि तथा उनकी समान अवधारणाओं पर कुछ विचार किया गया है और इस तथ्य को रेखांकित किया गया है।
  5. इतना ही नहीं , उन्होंने हरिबंस, बल्हा, मथुरा, गयन्द, नल्ह, भल्ल, सल्ह भिक्खा, कीरत, भाई मरदाना, सुन्दरदास, राइ बलवंड एवं सत्ता डूम, कलसहार, जालप जैसे 14 रचनाकारों की रचनाओं को आदिग्रन्थ में स्थान देकर उन्हें उच्च स्थान प्रदान किया।
  6. शेख़ खरीद , जयदेव , त्रिलोचन , सधना , नामदेव , वेणी , रामानन्द , कबीर , रविदास , पीपा , सैठा , धन्ना , भीखन , परमानन्द और सूरदास 15 संतों की वाणी को आदिग्रन्थ में संग्रहीत करके गुरुजी ने अपनी उदार मानवतावादी दृष्टि का परिचय दिया।
  7. इतना ही नहीं , उन्होंने हरिबंस , बल्हा , मथुरा , गयन्द , नल्ह , भल्ल , सल्ह भिक्खा , कीरत , भाई मरदाना , सुन्दरदास , राइ बलवंड एवं सत्ता डूम , कलसहार , जालप जैसे 14 रचनाकारों की रचनाओं को आदिग्रन्थ में स्थान देकर उन्हें उच्च स्थान प्रदान किया।
  8. सिख आदिग्रन्थ जिस मंजूषा में रखा जाता था उसके ऊपर अमरीकी विश्वविद्यालय के छात्रों को सम्बोधित कर रहे स्वामी विवेकानन्द का चित्र था , पांडीचेरी के अरविंद आश्रम की “ माँ ” का हाथ से बना रेखाचित्र था और लघुचित्र शैली में उस सूफी सन्त मियाँ मीर की पेन्टिंग थी , जिन्होंने अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर की आधारशिला रखी थी।
  9. सच्ची भक्ति संभव है | विभिन्न धर्मों में हो रहे पाखंड और अन्धविश्वास का उन्होंने जमकर विरोध किया | उन्होंने नफरत , और हिंसा का प्रतिकार प्रेम और अहिंसा से किया | इसीलिए वे लोगों के प्रेरणास्रोत बने | यह उनकी लोकप्रियता एवं भक्ति की पराकाष्ठा ही थी कि उनके रचित चालीस भक्ति पद सिख धर्म के आदिग्रन्थ में शामिल किये गए | संत रविदास का जीवन एवं उनके विचार भारतीय समाज के लिए सदैव अनुकरणीय एवं प्रासंगिक रहेंगे |
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