उपस्थ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- चेतना के इस मण्डल से त्व्क अर्थात त्वचा नामक स्पर्श की ज्ञानेन्द्रिय और उपस्थ नामक कर्मेन्द्रिय की सम्हाल होती है ।
- ( उपस्थ - योनि एवं लिंग संस्कृत हिन्दी शब्द कोष - वा 0 शि 0 आप्टे - पृ 0 213 )
- इसी प्रकार कर्मेंन्द्रियों के कार्य को देखें तो- कर्मेंद्रियॉ पॉच है-वाक , हस्त , पॉव , गुदा और उपस्थ अर्थात लिंग।
- पाणि पाद पायु और उपस्थ इन कर्म इन्द्रियों तथा ग्यान इन्द्रियों के रूप में दस प्रकार का कहा जाता है ।
- ५ कर्मेन्द्रियाँ - वाणी , हाथ, पैर, गुदा, उपस्थ व तैजस (वस्तु का रसना भाव) जिससे जल के संयोग से गंध, सुगंध बने।
- ये दो हाथ हो गए , दो पैर हो गए , गुदा , उपस्थ और ये जुबान हो गई जिससे खाते हैं .
- ये दो हाथ हो गए , दो पैर हो गए , गुदा , उपस्थ और ये जुबान हो गई जिससे खाते हैं .
- वड़ोदरा की एक अदालत ने मल्लिका शेरावत को सम्मन जारी कर उनसे अश्लीलता के एक मामले में 20 अप्रैल को अदालत में उपस्थ . ..
- जल तत्त्व रस रूप में जिह्वा द्वारा ग्रहण किया जाता है और उपस्थ द्वारा मूत्र रूप में शरीर से बाहर कर दिया जाता है।
- लँगोट ( सं . ) [ सं-पु . ] कमर पर बाँधने का एक प्रकार का वस्त्र जिससे केवल उपस्थ ढका जाता है ; कौपीन ; रुमाली।