कपोती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- कपोती की दिल की भड़ांस निकली नहीं , ” सारी रात नहीं माना शर्मा - भड़ाभड़ , भड़ा भड़-ये सुर्री , ये बम गोले ये आतिशबाज़ी - हे भगवान , सुनो गुटर ! दीवाली तो नहीं थी आज ” ।
- पर कपोती ! जब ये अपना ही भला नहीं कर पाते , तो हमारा क्या सोचेंगे ? ऊपर से बच्ची अम्मा का भी पता नहीं चला- दाना पानी भी नहीं आज तो . कपोती ! अरे , हम कहां आ गये उड़ते उड़ते , पहचानी सी जगह है।
- पर कपोती ! जब ये अपना ही भला नहीं कर पाते , तो हमारा क्या सोचेंगे ? ऊपर से बच्ची अम्मा का भी पता नहीं चला- दाना पानी भी नहीं आज तो . कपोती ! अरे , हम कहां आ गये उड़ते उड़ते , पहचानी सी जगह है।
- पर कपोती ! जब ये अपना ही भला नहीं कर पाते , तो हमारा क्या सोचेंगे ? ऊपर से बच्ची अम्मा का भी पता नहीं चला- दाना पानी भी नहीं आज तो . कपोती ! अरे , हम कहां आ गये उड़ते उड़ते , पहचानी सी जगह है।
- balloon title = “ न्या . कं . पृ . 4 ” style = color : blue > * / balloon > श्रीधर का यह विचार चिन्तनीय है कि कणाद की कपोती वृत्ति के आधार पर ही वैशेषिकों के प्रति यह उपालम्भ किया जाता है कि- ' अब कोई उपाय न रहने के कारण कणों को खाइये।
- पर यहां तो रोज़ ही कुछ ना कुछ होता रहे है - गुटर गूं - -धुएं-धक्कड़ से आँख तो खराब हो ही गयी ” - फिर कुछ सोचती सी बोली , ” ए गुटर चलो-गांव वापस चलें - यहां से दूर ” “ दूर - हूं ” , फिर जैसे कुछ कौंध गया , ” पर-फिर बच्ची अम्मा- ? ” कपोती झटका सा खाकर उठ बैठी ।