कृदंत का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ऐसी भी संयोज्य क्रियाएँ हैं जिनके साथ प्रयुक्त होने वाली मुख्य क्रिया तिर्यक कृदंत रूप में रहती है।
- इन दो कालों के अलावा आज्ञासूचक रूप , कर्तृवाचक कृदंत , कर्मवाचक कृदंत और क्रियार्थक संज्ञा भी है।
- इन दो कालों के अलावा आज्ञासूचक रूप , कर्तृवाचक कृदंत , कर्मवाचक कृदंत और क्रियार्थक संज्ञा भी है।
- यहां भी सदन के भीतर जूते चल चुके हैं ( याद करें-पंढ़रीनाथ कृदंत और मेघावाले प्रकरण ) ।
- वाक्यों का समुच्चय अन्तिम वाक्य को छोड़कर सभी वाक्यों की क्रियाओं के कृदंत रूपों के ज़रिये होता है।
- बहुत से अकर्मक कृदंत विकल्प से लघ्वंत भी होते हैं जैसे ठाढ़ , बैठ , आय , गय इत्यादि।
- कारण यह है कि पूरबी बोलियाँ भूतकाल में कृदंत रूप नहीं लेती हैं , तिङंत रूप ही रखती हैं।
- क्रियाको विभक्ति प्रतिमानमा भूतकालिक कृदंतको कमी हो ( कुनै वक्ताहरूको लागि जसलाइ लागि भूतकालिक कृदंत रूप हुन्छ, त्यो विभिन्न रूपले
- उपाधि-सम्बन्धी , विशेषण रूप में, कृदंत विशेषण प्रत्यय, कृदंत विशेषण, विशेष्यभूत विशेषण, विशेषण विभक्ति, गुणवाचक विशेषण, विशेषण के रूप बनाने का प्रत्यय
- उपाधि-सम्बन्धी , विशेषण रूप में, कृदंत विशेषण प्रत्यय, कृदंत विशेषण, विशेष्यभूत विशेषण, विशेषण विभक्ति, गुणवाचक विशेषण, विशेषण के रूप बनाने का प्रत्यय