चित्ररेखा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- उनकी इस प्रकार की कविताएँ ' अंजलि ' , ' रूपराशि ' , ' चित्ररेखा ' और ' चंद्रकिरण ' नाम के संग्रहों के रूप में प्रकाशित हुई हैं।
- उनकी इस प्रकार की कविताएँ ' अंजलि ' , ' रूपराशि ' , ' चित्ररेखा ' और ' चंद्रकिरण ' नाम के संग्रहों के रूप में प्रकाशित हुई हैं।
- उनकी इस प्रकार की कविताएँ ' अंजलि ' , ' रूपराशि ' , ' चित्ररेखा ' और ' चंद्रकिरण ' नाम के संग्रहों के रूप में प्रकाशित हुई हैं।
- जायसी की 21 रचनाओं के उल्लेख मिलते हैं जिसमें पद्मावत , अखरावट , आख़िरी कलाम , कहरनामा , चित्ररेखा आदि प्रमुख हैं पर उनकी ख्याति का आधार पद्मावत ग्रंथ ही है।
- जायसी की 21 रचनाओं के उल्लेख मिलते हैं जिसमें पद्मावत , अखरावट , आख़िरी कलाम , कहरनामा , चित्ररेखा आदि प्रमुख हैं पर उनकी ख्याति का आधार पद्मावत ग्रंथ ही है।
- गौरी ने हुसैन को कहलवाया कि “चित्ररेखा तेरे लिये कालस्वरूप है , यदि तुम इससे अलग नहीं रहे तो इसके परिणाम भुगतने होंगें।” इसका हुसैन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ और वह अनवरत चित्ररेखा से मिलता रहा।
- अखरावट · अनुराग बाँसुरी · अर्द्ध कथानक · आख़िरी कलाम · इंद्रावती · उज्ज्वलनीलमणि · उपदेशामृत · कहरानामा · चित्ररेखा · गोविन्द विरूदावली · दान केलिकौमुदी · नाटक-चन्द्रिका · पद्यावली · भक्तिकाल · भक्तमाल · भक्तिरसामृतसिन
- भूमिपूजन आजधमतरी- ! -झिरिया धोबी समाज रामसागर पारा, नयापारा परिक्षेत्र में सामुदायिक भवन का भूमिपूजन सांसद चंदूलाल साहू के मु य आतिथ्य में 12 सितंबर को होगा। अध्यक्षता समाज अध्यक्ष भरत निर्मलकर करेंगे। विशिष्ट अतिथि निःशक्तजन आयोग के अध्यक्ष इंदर चोपड़ा, नपाध्यक्ष डॉ एनपी गुप्ता, चित्ररेखा निर्मलकर, झाडूराम कोसरिया होंगे। कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की गई है।
- इन सब की सूचना धर्मयान कायस्थ और माधोभट्ट के जरिये गौरी तक पहुंची तब गौरी ने संदेशवाहक भेजकर मीर हुसैन व चित्ररेखा को उनके हवाले करने का संदेश भेजा जिसे पृथ्वीराज व उसके सामंतों में शरणागत की रक्षा का अपना धर्म समझते हुए ठुकरा दिया | चंदरबरदाई के अनुसार पृथ्वीराज- गौरी के आपसी बैर का मुख्य कारण यही था |
- तथा भगवान शिव के धरापर आगमन के समय को नजदीक जान भगवान कृष्ण के प्रपौत्र एवं चित्ररेखा के गर्भ से जन्म प्राप्त कामदेव अपनी त्रिलोक सुन्दरी अर्द्धांगिनी रतीदेवी के नेतृत्व में वासंती सेना के साथ अपने पांचो पुष्प-वाण से युक्त होकर भूत भावन भगवान भोले नाथ को रिझाने एवं सम्मोहित कर उन्हें काम पीड़ित करने के लिये कटिबद्ध हो जाते है .