जलावतनी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इस पहली जलावतनी के वर्षों बाद नेरूदा ने साल्वादोर आयेन्दे की समाजवादी सरकार के सहयोगी के रूप में कुछ साल निस्बतन सुख-शान्ति से गुज़ारे लेकिन फिर 1973 में औगस्तो पिनोशे द्वारा आयेन्दे का तख़्ता पलटे जाने के दौरान हुई उथल-पुथल में दिल के दौरे से उनका निधन हो गया।
- आज हुसेन को श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी आत्म कथा के आखिरी अध्याय का यह अंश पेश करते हुए मैं बहुत भावुक भी हूं क्योंकि अपने वतन से बहुत प्यार करने वाले इस अति संवेदनशील इनसान को कुछ कट्टरपंथी हिन्दुओं के सिरफिरेपन के कारण आत्म-निर्वासन झेलना पड़ा और जलावतनी में ही उनकी मृत्यु हुई।
- ( ज़ाफ़री, 2007) जलावतनी का गीत गाते ये निर्वासित कहते हैं- “मैं पहनता हूँ/ अपने ही देश के जूते/पर यह कल्पना करता हूँ/अपनी धरती पर चल रहा हूँ/ ” इस ख़ूबसूरत ख़याल के बाद वे कहते है- “मैं पहनता हूँ अपने ही देश के जूते/जो मुझे कहीं भी ले जा सकते हैं/ सिर्फ़ वहाँ नहीं/ जहाँ से हमें निकाला गया”।
- डा . नूर की पंजाबी में पाँच कविता पुस्तकें ( ‘ विरख निपत्तरे ' , ‘ कविता दी जलावतनी ' , ‘ सरदल दे आर-पार ' , ‘ मौलसिरी ' और ‘ नाल-नाल तुरदियाँ ' ) , एक कविता-संग्रह हिंदी में ( साथ-साथ चलते हुए ) तथा आलोचना की लगभग ढाई दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
- डा। नूर की पंजाबी में पाँच कविता पुस्तकें ( ‘ विरख निपत्तरे ', ‘ कविता दी जलावतनी ', ‘ सरदल दे आर - पार ', ‘ मौलसिरी ' और ‘ नाल - नाल तुरदियाँ '), एक कविता - संग्रह हिंदी में ( साथ - साथ चलते हुए ) तथा आलोचना की लगभग ढाई दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
- ( संतोषी, 2007) जलावतनी का अर्थ होता है- अपनी जड़ों से कट जाना, अपनी अस्मिता खो देना, निरंतर अनिश्चय में जीना, अपने पद, प्रतिष्ठा और इतिहास से वंचित हो जाना, अपने अस्तित्व, आस्था, मूल्य तथा मानवीय गरिमा के खतरे में पड़ जाने का और जीवन की तलछट का अनुभव करना; अथवा तो फिर इन्हीं परिस्थितियों में जिजीविषा के साथ नयी संभावनाओं को तलाशना।
- जलावतनी में एक स्वप्न देख रहा हूँ मैं मेरे छूटे हुए घर के आँगन में फिर से हरा हो गया है चिनार और उसकी एक डाल पर आ बैठी है झक सफेद कबूतरों की एक जोड़ी मुझे देखती हुई अनझिप ये कबूतर उतरना चाह रहे हैं मेरे कंधों पर लगा मुझे ये आएँ हैं स्वामी अमरनाथ गुफा से उड़ कर मेरे उजाड़ आँगन में
- ( संतोषी , 2007 ) जलावतनी का अर्थ होता है- अपनी जड़ों से कट जाना , अपनी अस्मिता खो देना , निरंतर अनिश्चय में जीना , अपने पद , प्रतिष्ठा और इतिहास से वंचित हो जाना , अपने अस्तित्व , आस्था , मूल्य तथा मानवीय गरिमा के खतरे में पड़ जाने का और जीवन की तलछट का अनुभव करना ; अथवा तो फिर इन्हीं परिस्थितियों में जिजीविषा के साथ नयी संभावनाओं को तलाशना।
- ( ज़ाफ़री , 2007 ) जलावतनी का गीत गाते ये निर्वासित कहते हैं- “ मैं पहनता हूँ / अपने ही देश के जूते / पर यह कल्पना करता हूँ / अपनी धरती पर चल रहा हूँ / ” इस ख़ूबसूरत ख़याल के बाद वे कहते है- “ मैं पहनता हूँ अपने ही देश के जूते / जो मुझे कहीं भी ले जा सकते हैं / सिर्फ़ वहाँ नहीं / जहाँ से हमें निकाला गया ” ।