झमझम का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अल्मोड़े से कसारदेवी की ओर बढ़ चली थी गाड़ी चारों ओर फैली हरियाली कोमल-कोमल चातुरमासी घास बॉज-बुरूंश-चीड़-देवदार के विस्तृत वन-कानन कभी पड़ रही थी जिनमें बरखा की बूदें झमझम कभी ढक लेता जिनको मॉ की ऑचल सा कुहारा चमचम कहीं मिल जाते थे
- इसके बाद , वह विचार कर रही थी कि अब किस ओर चलना चाहिए , इतने में उसे परिचित ' झमझम ' शब्द सुनाई दिया ? थोड़ी देर में कन्धे पर चिट्ठियों का थैला लटकाए हांफता हुआ पत्रवाहक ' खट ' आ पहुंचा।
- इसके बाद , वह विचार कर रही थी कि अब किस ओर चलना चाहिए , इतने में उसे परिचित ' झमझम ' शब्द सुनाई दिया ? थोड़ी देर में कन्धे पर चिट्ठियों का थैला लटकाए हांफता हुआ पत्रवाहक ' खट ' आ पहुंचा।
- पर चढ़ींमैदान में निकले बिजूकेमेह क्या बरसासभी ने हाथ में लेकरउछाले दिन-महेश अनघ16 अगस्त 2005 मेघ घटा घनघोरअश्व वेग-सी दौड़ गई हैमेघ घटा घनघोरबूँदों की पायल को पहनेनाच रहा मन मोरयमुना के तट वंशी बजाएगोपियों संग चितचोरधरती पर झमझम ये बूँदेंखूब मचाए शोर-प्रत्यक्षा16 अगस्त 2005
- उन्हीं में से किसी से बंगला भाषा में वार्तालाप करते हुए सुशील जी ने होटल का रास्ता जानने का प्रयास किया … ठीक ठीक तो कुछ पता नहीं ही बता पाए वो लोग … फिर हम मैप के सहारे आगे बढ़ने लगे … झमझम बारिश हो रही थी .
- और दामोदर चाचा वापस पेटी पर हाथ फिराते उसकी आंखों में आंख गड़ाये सवाल किये , ‘हमारी बेगम कौनवाला गज़ल सुनेंगी?' मेरी सचमुच इच्छा हो रही थी इस नंगे प्रहसन से आंखें फेरकर झमझम बरसात में जाकर खड़ी हो जाऊं और तबतक खड़ी रहूं जबतक मुझे निमोनिया न हो जाये..
- और दामोदर चाचा वापस पेटी पर हाथ फिराते उसकी आंखों में आंख गड़ाये सवाल किये , ‘हमारी बेगम कौनवाला गज़ल सुनेंगी?' मेरी सचमुच इच्छा हो रही थी इस नंगे प्रहसन से आंखें फेर कर झमझम बरसात में जाकर खड़ी हो जाऊं और तब तक खड़ी रहूं जबतक मुझे निमोनिया न हो जाये..
- बेगम अख्तर की , हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब , किसी झमझम बारिश में खिडकी के सिल पर सर टिका शीशे के अंदर के महफूज़पने से बरसात के दिल तोड देने जैसी कैसी तो टीस से भरा अवसाद का कसाईन स्वाद अब भी जीभ पर , नोक पर छलछला देता है ।
- शायद खोज खत्म हुई || मस्जिद में ना खुदा पाया , मंदिर में ना इश्वर दिखा , गिरजाघर भी सूना पाया , फिर कुरान का पाठ किया , और झमझम का आस्वाद लिया | गीता गान पूरा कर , गंगाजल का पान किया | बाइबल के भी पन्ने टंटोले, सोचा जिसस मिल जायेगा | थोडा सा सहम गया , हक्का-बक्का [...]
- शक होता है कहीं वह मैं तो नहीं ? क्योंकि जब ‘ दिल का दर्द ' लिखने बैठा तो दिमाग में कोस्मोलोजी घूम रही थी तो लिख बैठा - “ झांझर झमझम बजी , सृष्टि का मूल / तारे , ग्रह नक्षत्र , चितवन की धूल / मेघ काले छिद्र से , नैन के काजल / युग-युगान्तर निकल गये , कि जैसे पल / कल के बहते आँसुओं का ' समन्दर ' आज है / क्या करें दिल का दर्द लाइलाज है / ”