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तंगदस्ती का अर्थ

तंगदस्ती अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. लिहाजा कोशिश करने की जुर्रत भी नहीं करूंगा हां इतना ज़रूर अर्ज़ करना चाहता हूं कि आपकी अपनी रचनाएं , एक क्षण मुझ जैसे नौसिखिये को अपने ' ज्ञान ' की तंगदस्ती का अहसास करा देती हैं .
  2. उनके बारे में राय बन रही है कि ऐसे नेता लोग मुसलमान तो होते हैं और उसी हैसियत से सियासत भी करते हैं , लैकिन मजहबी मालूमात की तंगदस्ती की वजह से इस तरह के बयान देकर मजहबी जज्बात को ठेस पहुंचा कर सियासत करते हैं।
  3. 318 - आपने अपने फ़रज़न्द मोहम्मद हनफ़िया से फ़रमाया - फ़रज़न्द ! मैं तुम्हारे बारे में फ़क्र व तंगदस्ती से डरता हूँ लेहाज़ा उससे तुम अल्लाह की पनाह मांगो के फ़क्र दीन की कमज़ोरी , अक़्ल की परेशानी और लोगों की नफ़रत का सबब बन जाता है।
  4. ज़मीनों की बरबादी अहले ज़मीन की तंगदस्ती से पैदा होती है और तंगदस्ती का सबब हुक्काम के नफ़्स का जमाआवरी की तरफ़ रूझान होता है और उनकी यह बदज़नी होती है के हुकूमत बाक़ी रहने वाली नहीं है और वह दूसरे लोगों के हालात से इबरत हासिल नहीं करते हैं।
  5. ज़मीनों की बरबादी अहले ज़मीन की तंगदस्ती से पैदा होती है और तंगदस्ती का सबब हुक्काम के नफ़्स का जमाआवरी की तरफ़ रूझान होता है और उनकी यह बदज़नी होती है के हुकूमत बाक़ी रहने वाली नहीं है और वह दूसरे लोगों के हालात से इबरत हासिल नहीं करते हैं।
  6. ए मीरे -मजलिस तेरी सदारत क़ुबूल करके कहा है सबने मगर पसे -अंजुमन है कोई मैं आज जिस पर ग़ज़ल कहूँगी लाजवाब . ... उसे मकानों की आरज़ू थी मेरी तम्मना थी एक घर की तेरी ज़मीं पर, तेरे मकां पर, मैं आज बेघर ग़ज़ल कहूँगी तंगदस्ती में खुद्दारी की खूबसूरत अक्काशी करता शेर....
  7. और ज़मीन की तबाही तो इस से आती है कि काश्तकारों के हाथ तंग हो जायें और उन की तंगदस्ती इस वजह से होती है कि हुक्काम माल व दौलत समेटने पर तुल जाते हैं और उन्हें अपने इकतिदार के खत्म होने का खटका लगा रहता है और इब्रतों से बहुत कम फ़ायदा उठाना चाहते हैं
  8. तंगदस्ती और दुनिया की वक़्ती महरूमियों पर सब्र और हिर्स व तमा से दूरी इंसान को परहेज़गार बनाती है और ख़ुदा की नेमतों के एतराफ़ से दिल को रुहानी सुकून मिलता है ख़ुदा का शुक्र अदा करने वाला इंसान ना तंगदस्ती पर ख़ुदा से मायूस होता है और ना ख़ुशहाली में शेखी बघारने और इतराने लगता है।
  9. तंगदस्ती और दुनिया की वक़्ती महरूमियों पर सब्र और हिर्स व तमा से दूरी इंसान को परहेज़गार बनाती है और ख़ुदा की नेमतों के एतराफ़ से दिल को रुहानी सुकून मिलता है ख़ुदा का शुक्र अदा करने वाला इंसान ना तंगदस्ती पर ख़ुदा से मायूस होता है और ना ख़ुशहाली में शेखी बघारने और इतराने लगता है।
  10. आसमां छूने लगीं हैं मुर्दा-तन की कीमतें ये मेरी जिंदादिली अर्जां हुई किस दौर में इक सिफ़र के ही सफ़र में गुम हुए आलम कई दिल की हर उलझन हमारी जां हुई किस दौर में कितनी वजहें पूछती हैं मुझसे जीने की वज़ह जिंदगी , तू भी मेरी जानां हुई किस दौर में क्यूं ग़ज़ल की तंगदस्ती का ग़िला आशिक करे गुफतगू माशूक से आसां हुई किस दौर में
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