त्यौरी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ग़फूर वहीं का वहीं खड़ा हो गया और बच्चों की माँ की चढ़ी हुई त्यौरी और तनी हुई आँखें देख कर उसने दोनों को उतार दिया और खुद बड़ी मुश्किल से गिरते-गिरते बचा।
- इसके बाद जब डीपी यादव को सपा मे लाने के संदर्भ मे समाजवादी पार्टी की आधारशिला रखने वाले मे सबसे खास आजम खान ने बयान दिया तो अखिलेश की त्यौरी चढना तय था।
- भाषण में तो यह बात नये अंदाज से त्यौरी चढ़ाकर , मुंह बिचकाकर बखूबी कही जा सकती है कि साहित्य है क्या बला ? हारमोनियम, सारंगी, ढपली या तबला ? नासमझ लोगों को बहका दिया।
- विजय बहादुर सिंह के शब्दों में - “ नागार्जुन अकेले ऐसे कवि हैं जिन्हे न तो शासन की त्यौरी का भय त्रस्त करता है न ही कला सरस्वती का आगन्तुक कोप ही . ”
- उसने सेठ से कहा - ‘कल तो आप साधु महाराज की बातें सुनकर बड़ा भक्ति-भाव जता रहे थे और आज उन्हें भूल गए ? ' सेठ त्यौरी चढ़ाकर बोला - ‘तुम सामान खरीदने आए हो या उपदेश देने।'
- और चारों ओर आतंकवाद व आतंकवादी घटनाओं से जूझ रहे पाकिस्तान के इसी दहशतनाक वातावरण में एक बार फिर खतरों के खिलाड़ी समझे जाने वाले परवेज़ मुशर्रफ ने पाकिस्तान में अपनी बहुप्रतीक्षित वापसी कर कई आतंकी संगठनों के रहनुमाओं की त्यौरी पर बल चढ़ा दिये हैं।
- कार्रवाई की तैयारी - समय पर जबाव न मिलने से विभाग के अधिकारियों की त्यौरी और चढ गई है बताया जाता है कि विभाग ऐसे विद्यालयों के विरूद्ध कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है कहने सुनने की इस बात में कितना दम है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा ।
- ' ' अशिक्षित और भोले मतदाताओं को चालाक राजनीतिज्ञों द्वारा उनके वोट पाने के लिए ठगने का भंडा फोड़ करते हुए, चतुर्वेदी ने जन प्रतिनिधियों के लिए ये कसौटी रखी थी - “जो सरकारी नौकरों की मुस्कुराहटों पर कुर्बान होने के और उनकी त्यौरी चढ़ते जाने पर गठिया ग्रस्त हो जाने के लिए उतारू न हो जाए ।
- मैं पहले बहुत पगलाई रही हूँ अब तक मेरे परिवार का जो धर्म होता था मेरा उस पर कभी ध्यान नहीं गया मैं परिवार को ही धर्म मानने का कुफ्र करती रही हूँ मैं पगली सुन-सुनाकर , पति को ही ईश्वर कहती रही हूँ मेरे जाने तो घर के लोगों की मुस्कराहट और त्यौरी ही स्वर्ग-नरक रहे - मैं शायद कलियुग की बीट थी धर्मगुरु
- कभी दीवान जी और मुंशी जी के भाई सिर उठाते हैं , कभी साहू जी त्यौरी बदलते और आप विधाता बन बैठते हैं और कभी पुरोहितों और गुरुओं की करारी डाँट आती है कि खबरदार हमारे सामने ब्राह्मण होने का नाम भी मत लेना , नहीं तो सात पुश्तों तक नरक में ही सड़ते रह जाओगे , सब कर्म-धर्म और पिंड-पानी यों ही रह जावेगा ! इतने पर भी खूबी यह है कि आप लोग अपना एक अलग ब्राह्मण दल बनाते हैं और उसे कायम रखना भी चाहते हैं।