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निर्भाव का अर्थ

निर्भाव अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. आज भी उसकी हालत जस की तक है , देश तब भी आजाद था आज भी है , अलबत्ता अब उसका चेहरा पहले से ज्यादा उदास ज्यादा निर्भाव है , कहीं कोई चमक कोई उमीद नहीं , फ़िर न-उमीदी भी कैसी ?
  2. आज बरसो बाद जब उसके घर गया तो बारी मेरी थी , मै जोर जोर से रो रहा था और वो शांत , निश्छल , निर्भाव , जमीन पे पड़ा था , किसी बुजुर्ग कि आवाज आई , “ मिट्टी जल्दी ले चलो नहीं खराब हो जायेगा ” ……
  3. आज बरसो बाद जब उसके घर गया तो बारी मेरी थी , मै जोर जोर से रो रहा था और वो शांत , निश्छल , निर्भाव , जमीन पे पड़ा था , किसी बुजुर्ग कि आवाज आई , “ मिट्टी जल्दी ले चलो नहीं खराब हो जायेगा ” ……
  4. जब वे फ़िल्म देख रहे होते थे तो अपने रूमाल को चबा डालते थे और फ़िल्म संपादक कभी कभी रचनात्मक सुझाव दे दिया करता था , जिनमें से कुछ को वे बाल सुलभ रोमांच के साथ स्वीकार कर लिया करते थे और अन्य को अपने निर्भाव चेहरे से अस्वीकार कर दिया करते थे।
  5. जब वे फ़िल्म देख रहे होते थे तो अपने रूमाल को चबा डालते थे और फ़िल्म संपादक कभी कभी रचनात्मक सुझाव दे दिया करता था , जिनमें से कुछ को वे बाल सुलभ रोमांच के साथ स्वीकार कर लिया करते थे और अन्य को अपने निर्भाव चेहरे से अस्वीकार कर दिया करते थे।
  6. जब वे फ़िल्म देख रहे होते थे तो अपने रूमाल को चबा डालते थे और फ़िल्म संपादक कभी कभी रचनात्मक सुझाव दे दिया करता था , जिनमें से कुछ को वे बाल सुलभ रोमांच के साथ स्वीकार कर लिया करते थे और अन्य को अपने निर्भाव चेहरे से अस्वीकार कर दिया करते थे।
  7. इस काल में शैल्पिक संरचना , व्याकरणीय संरचना , आतंरिक संरचना- वाक्य , अलंकर , प्रतीक , बिम्ब , मिथ , फैन्तासी , लय , विरोधाभास , व्यंजना , विडम्बना , पारम्परिक लय , शाश्त्रीय लय , मुक्त लय , अरथ लय , में कई नए प्रयोग भी हुए तो परंपरा का भी निर्भाव हुआ .
  8. तिस पर तुर्रा यह कि इनमें से कुछ खुद को कलाकार भी मानने समझने लगें हैं . नृत्यु भी अच्छा ही कर लेतें हैं .लेकिन यह नृत्य उनके अभ्यास का शिखर ज़रूर है ,भाव का नहीं .निर्भाव हैं ये लोग .जबकि भारत में कलाकार बनने से पहले आदमी बनना भी ज़रूरी है .आदमी का आदमी होना पहली पात्रता है कलाकार बनने की .जिसके पास आदमियत नहीं है वह कलाकार कैसे हो सकता है ?
  9. मुराद मेरी इस तहरीर से ये है कि हम मुसलमानों ने अपनी रवादारी की बिना पर हिंदुओं की तहज़ीब और उनकी तख़लीक ( रचना , निर्भाव ) का इतना गहरा मुतालआ ( अध्ययन ) किया कि महाभारत जैसे खालिस हिंदुआना म जहबी नाटक में भी एक मुसलमान से गाने बाँधने की दरंखस्त की गई और उसने वो गाने बाँधे कि आज तक कोई ड्रामा मौसींकी के लिहा जा से इस शान का नहीं हुआ।
  10. मुराद मेरी इस तहरीर से ये है कि हम मुसलमानों ने अपनी रवादारी की बिना पर हिंदुओं की तहज़ीब और उनकी तख़लीक ( रचना , निर्भाव ) का इतना गहरा मुतालआ ( अध्ययन ) किया कि महाभारत जैसे खालिस हिंदुआना म जहबी नाटक में भी एक मुसलमान से गाने बाँधने की दरंखस्त की गई और उसने वो गाने बाँधे कि आज तक कोई ड्रामा मौसींकी के लिहा जा से इस शान का नहीं हुआ।
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