पटोल का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- 2 . सन्निपात बुखार : त्रिकुटा ( सोंठ , मिर्च और पीपल ) , त्रिफला ( हरड़ , बहेड़ा और आंवला ) , पटोल के पत्तें , नीम की छाल , कुटकी , चिरायता , इन्द्रजौ , पाढ़ल और गिलोय आदि को मिलाकर काढ़ा बना लें।
- फिल्म की कहानी शुरू हुए कुछ ही मिनट होते हैं और लोग सूरज ( नील नितिन मुकेश ) का कैरेक्टर समझ ही रहे होते हैं कि मोनिका ( अमीषा पटोल ) और आशीष ( जतिन ग्रेवाल ) का झाड़ियों के पीछे लव मेकिंग सीन शुरू हो जाता है।
- इस चूर्ण को धान्यक फल , गुडूची तना और पटोल के पत्ते के 14 से 28 मिलीलीटर काढ़े में मिलाकर इसमें 5 से 10 ग्राम शर्करा या 5 से 10 ग्राम शहद मिलाकर दिन में 3 बार लेने से चौथे दिन आने वाला बुखार अगली बार नहीं आता है।
- 5 - 5 ग्राम नीम की छाल , पटोल और गिलोय को मोटा-मोटा पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें , जब उबलने पर पानी लगभग 50 मिलीलीटर के करीब रह जाये तो उसे छानकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी के रोग में आराम आता है।
- 5 - 5 ग्राम नीम की छाल , पटोल और गिलोय को मोटा-मोटा पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें , जब उबलने पर पानी लगभग 50 मिलीलीटर के करीब रह जाये तो उसे छानकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी के रोग में आराम आता है।
- पैत्तिक बुखार में आंवले के साथ काढा बनाकर और कफज ज्वर में त्रिफला , पटोल पत्र कुटकी , पिप्पली मूल के साथ काढा बनाकर शहद के साथ प्रयोग करने से लाभ मिलता है I ये तो कुछ चुनिन्दा नुस्खे हैं जिनको बताने का मकसद इस वनस्पति के महत्व को उजागर करना मात्र है …
- पैत्तिक बुखार में आंवले के साथ काढा बनाकर और कफज ज्वर में त्रिफला , पटोल पत्र कुटकी , पिप्पली मूल के साथ काढा बनाकर शहद के साथ प्रयोग करने से लाभ मिलता है I ये तो कुछ चुनिन्दा नुस्खे हैं जिनको बताने का मकसद इस वनस्पति के महत्व को उजागर करना मात्र है …
- 1 . आभिन्यास बुखार : त्रिकुटु , त्रिफला तथा मुस्तक जड़ , कटुकी प्रकन्द , निम्ब छाल , पटोल पत्र , वासा पुष्प व किरात तिक्त के पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) और गुडूची को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें।
- 1 . आभिन्यास बुखार : त्रिकुटु , त्रिफला तथा मुस्तक जड़ , कटुकी प्रकन्द , निम्ब छाल , पटोल पत्र , वासा पुष्प व किरात तिक्त के पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) और गुडूची को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें।
- पटोल के पत्ते , निम्ब के पत्ते , असन की लकड़ी , पाठा पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) , मूर्वामूल , गुडूचौतना , कटुकी प्रकन्द और शुंठी को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें , इसी काढ़े को 14 मिली लीटर से लेकर 28 मिली लीटर को खुराक की मात्रा में एक दिन में सुबह और शाम पीने स्तनों के दूध की खराबी दूर हो जाती है।