पूर्णकाम का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- कविता मनुष्य को पूर्णकाम बनाए तभी वह जन-प्रिय भी हो सकती है , लोगों को जीने का ढंग सिखा सकती है और निरंतर उनके साथ चल सकती है , उनकी अपनी बनकर .
- व्यवहार - परमार्थ - साधक , सुत्र - रूप मन्त्र - रूप इन उपदेशामृत कणों की महिमा इसलिये महान है कि ये आप्त - काम , पूर्णकाम , परमनिष्काम अमलात्मान्तःकरण के स्वाभाविक उद्गार हैं।
- व्यवहार - परमार्थ - साधक , सुत्र - रूप मन्त्र - रूप इन उपदेशामृत कणों की महिमा इसलिये महान है कि ये आप्त - काम , पूर्णकाम , परमनिष्काम अमलात्मान्तःकरण के स्वाभाविक उद्गार हैं।
- पता नहीं क्यों ऐसे कामयाब लोगों से मुझे बहुत डर लगता है और यकायक बाबा नागार्जुन याद आ जाते हैं : जो नहीं हो सके पूर्णकाम / मैं करता हूं उनको प्रणा म. ..
- जो भोगों को महत्त्व देनेवाला मनुष्य कामना करता है , वह कामनाओं के कारण वहाँ-वहाँ ही उत्पन्न होता है , किन्तु पूर्णकाम एवं शुद्ध अन्तःकरणवाले पुरूष की समस्त कामनाँ यहाँ ही सर्वथा विलीन ( समाप्त ) हो जाती हैं।
- राम की जलसमाधि की यह बेला संपूर्ण समर्पण की है , जिसमें ' देवत्व हुआ लो पूर्णकाम / नीली माटी निष्काम हुई ' , किन्तु यही बेला है त्रासक सुधियों की भी , जो बीत गया उसे सहेजने की भी।
- सहज उल्लास जो छह महीने के बच्चे में प्रकट होता है भीतर से , वही उस इंसान में भी प्रकट हो सकता है जिसने सारी तृष्णाओं का त्याग कर दिया है , जो पूर्णकाम है , उसके जीवन की बागडोर अब अस्तित्त्व के हाथों में है .
- आपने मुझे अत्यंत अभिमानवश जानकर यह कहा कि तुम शरीर रख लो , परंतु ऐसा मूर्ख कौन होगा जो हठपूर्वक कल्पवृक्ष को काटकर उससे बबूर के बाड़ लगाएगा ( अर्थात् पूर्णकाम बना देने वाले आपको छोड़कर आपसे इस नश्वर शरीर की रक्षा चाहेगा ? ) ॥ 1 ॥
- आकंठ डूब कर वह प्रेम का सर्वस्व प्राप्त कर जाती है - ‘ प्रेम में स्त्री इतनी पूर्णकाम थी / कि उसे पाना नहीं था कुछ भी / न कहना था किसी से कुछ / क्योंकि वह थी- हो रही थी- / सर्वांग सुंदरी , कोमल और / लवलीना।
- एक क्रन्तिकारी वीर योद्धा के समान मैं लड़ा था ले दुधारी तलवार इतिहास में . दुःख तो यही है मेरे बाद मेरा कुछ भी हुआ नहीं कहीं कोई प्रचार इतिहास में.एक अभिलाष थी कि देश के लिये मिटूँसो कर के दिखा दिया प्रहार इतिहास में.एक जन्म ले के भी न हो सका मैं पूर्णकाम जन्म अभी लूँगा बार-बार इतिहास में.