प्रबन्धकाव्य का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- राजस्थान के सम्मानित एवं पुरष्कृत कविवर श्री बलवीर सिंह ‘ करुण ' अपने गीतिकाव्य और प्रबन्धकाव्य की प्रगतिशील भारतीय जीवन दृष्टि और प्रभावपूर्ण शब्दशिल्प के कारण अब अखिल भारतीय स्तर पर चर्चित हैं।
- नतीजा यह हुआ है कि जहां महाभारत में रामोपाख्यान , नलोपाख्यान , शकुन्तलोपाख्यान जैसी कथाएं उसके इतिहास चरित्र को निखारती हैं तो वहां शान्तिपर्व , अनुशासनपूर्व जैसे अंशों से इस प्रबन्धकाव्य का धर्मशास्त्र चरित्र उभर कर सामने आ गया है।
- इससे पहले अकादमी के उपसचिव ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने उनका संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि 1948 में राजस्थान के नवलगढ़ में जन्मे उदभ्रांत जी की पहचान नवगीतकार , गज़लगो , समकालीन कविता के कवि , आलोचक के साथ-साथ प्रबन्धकाव्य रचियता के रूप में है।
- इसी तरह प्रबन्धकाव्य लिखते समय भले ही अधिकतर लोगों ने पूर्वी क्षेत्र में अवधी भाषा , पश्चिम क्षेत्र में डिंगल का प्रयोग किया, किन्तु गेय पदों या मुक्तकों की रचना करते समय पूर्व या पश्चिम हर एक प्रदेश के कवि ब्रजभाषा का अध्ययन करते हैं।
- इसी तरह प्रबन्धकाव्य लिखते समय भले ही अधिकतर लोगों ने पूर्वी क्षेत्र में अवधी भाषा , पश्चिम क्षेत्र में डिंगल का प्रयोग किया , किन्तु गेय पदों या मुक्तकों की रचना करते समय पूर्व या पश्चिम हर एक प्रदेश के कवि ब्रजभाषा का अध्ययन करते हैं।
- ' मानस' 'गीतावली' की तुलना में आकार-प्रकार से चौगुना है और प्रबन्धकाव्य हैं, फिर भी ये कथा-विस्तार से ज्ञात होता है कि 'गीतावली' के कुछ अंश 'मानस' के पूर्व की रचना अवश्य होंगे और इसी प्रकार उपर्युक्त दूसरे प्रकार के कथा-विस्तारों से ज्ञात होता है कि उसके अंश 'रामचरित मानस' के बाद की रचना होंगे।
- ' मानस ' ' गीतावली ' की तुलना में आकार-प्रकार से चौगुना है और प्रबन्धकाव्य हैं , फिर भी ये कथा-विस्तार से ज्ञात होता है कि ' गीतावली ' के कुछ अंश ' मानस ' के पूर्व की रचना अवश्य होंगे और इसी प्रकार उपर्युक्त दूसरे प्रकार के कथा-विस्तारों से ज्ञात होता है कि उसके अंश ' रामचरित मानस ' के बाद की रचना होंगे।