भवती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- भगवान श्री कृषण ने गीता में कहा है कि “ यदा - यदा ही धर्मस्य ग्लानिर भवती भारत , अभुथान्मधर्मस्य तदात्म्नम सृजीयम्य्हम ” | अर्थात जब कभी भी भारत में धर्म कि हानी होती या ग्लानी होती है , तब - तब परमात्मा किसी ऐसी आत्मा कि संरचना करता है जो उस समय के पापियों का संहार करता है | अब यहाँ कई सवाल पैदा हो जाते हैं , १ .