मागधी प्राकृत का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ' दशरूप ‘ में लिखा गया है कि पिशाच और नीच जातियां मागधी बोलती हैं और ' सरस्वतीकण्ठाभरण ` का मत है कि नीच स्थिति के लोग मागधी प्राकृत काम में लाते हैं।
- जहां तक नाटकों में प्रयुक्त होने वाली मागधी प्राकृत का सम्बन्ध है उससे मगही का विकास नहीं माना जा सकता है क्योंकि मागधी में र का ल और स का श हो जाता है।
- यहां यह प्रश्न उपस्थित होता है कि मगही भाषा का विकास मागधी ( पालि ) अथवा नाटकों में प्रयुक्त मागधी प्राकृत से हुआ अथवा मगध जनपद में बोली जाने वाली किसी अन्य भाषा से।
- प्रोफेसर महावीर सरन जैन का मत है कि जैन साहित्य की दृष्टि से दिगम्बर आम्नाय के आचार्य गुणधर एवं आचार्य धरसेन के ग्रंथों में मागधी प्राकृत का नहीं अपितु शौरसेनी प्राकृत का प्रयोग हुआ है।
- राजस्थानी , ब्रजभाषा, खड़ी बोली का संबंध शौरसेनी अपभ्रंश और शौरसेनी प्राकृत से रहा है, तो अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी, आदि का अर्ध-मागधीप्राकृत से. बिहार की जनपदीय भाषाओं (मैथिली, मगही, भोजपुरी, अंगिका, वज्जिका) का नाता मागधी अपभ्रंश तथा मागधी प्राकृत से जुड़ता है.
- राजस्थानी , ब्रजभाषा , खड़ी बोली का संबंध शौरसेनी अपभ्रंश और शौरसेनी प्राकृत से रहा है , तो अवधी , बघेली , छत्तीसगढ़ी , आदि का अर्ध-मागधीप्राकृत से . बिहार की जनपदीय भाषाओं ( मैथिली , मगही , भोजपुरी , अंगिका , वज्जिका ) का नाता मागधी अपभ्रंश तथा मागधी प्राकृत से जुड़ता है .
- इसे संक्षेप में समझने के लिये महाराष्ट्र प्रदेश के नामों जैसे गोखले , खेर, परांजपे, पाध्ये, मुंजे गोडवोले, तांबे, तथा लंका में प्रचलित नामों जैसे गुणतिलके सेना नायके, बंदरनायक आदि में जो अकारांत कर्ता एक वचन के रूप से ए प्रत्यय दिखाई देता है, वही पूर्व की मागधी प्राकृत मे अपने नियमित स्थिरता को प्राप्त हुआ पाया जाता है।
- इसे संक्षेप में समझने के लिये महाराष्ट्र प्रदेश के नामों जैसे गोखले , खेर, परांजपे, पाध्ये, मुंजे गोडवोले, तांबे, तथा लंका में प्रचलित नामों जैसे गुणतिलके सेना नायके, बंदरनायक आदि में जो अकारांत कर्ता एक वचन के रूप से ए प्रत्यय दिखाई देता है, वही पूर्व की मागधी प्राकृत मे अपने नियमित स्थिरता को प्राप्त हुआ पाया जाता है।