मूल द्रव्य का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ( 3 ) कार्बनीकरण - कुछ पादपों और कुछ प्राणियों में , जैसे ग्रैप्टोलाइट ( graptolite ) , जिनमें कंकाल काइटिन का बना होता है , मूल द्रव्य कार्बनीकृत हो जाता है।
- अज्ञानदशा में क्रोध , मान, माया, लोभ इत्यादि प्रकृति का कर्ता है और उस भाव के फल का भोक्ता होने से प्रसंगवशात घटपटादि पदार्थ का निमित्तरूप से कर्ता है अर्थात घटपटादि पदार्थ के मूल द्रव्य का कर्ता नहीं है परंतु उसे किसी आकार में लाने रूप क्रिया का कर्ता है।
- पतला करने की इस क्रिया को नाम दिया गया शक्तिकृत ( Potencialization ) करना | इस प्रकार पुनः और शक्तिकृत करने हेतु और पतला से पतला किया गया | लेकिन ओषधि के मूल द्रव्य को अल्कोहल या मिल्क सुगर से पतला करना या मिलाना ही नहीं बल्कि उसमें उचित ढंग से फेटा अर्थात स्ट्रोक लगाना जरूरी होता है | आजकल यह काम आटोमेटिक मशीनों द्वारा होता है |
- एक होजाऊँ“ और इस इच्छा के निमिष मात्र में ही लय क्रम आरम्भ होजाता है सारे कण , पदार्थ, ऊर्जा के हर रूप, काल व गति -> मूल द्रव्य में -> महाविष्णु की नाभि केंद्र -> सघन पिंड में-> अग्निदेव की दाढ़ों में ->( क्रियाशील ऊर्जा)-> अपः तत्त्व में -> मूल ऊर्जा में( आदि माया-स्थिर ऊर्जा ) ->महाकाश में ->हिरन्यगर्भ में (व्यक्त ब्रह्म)-> अव्यक्त ब्रह्म में लीन होकर पुनः वही एक ब्रह्म रह जाता है पुनः ” एकोहं बहुस्याम ” द्वारा सृष्टि की पुनः रचना हेत तत्पर।