मृषा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- देखिये आत्म ज्ञानी सन्त बहुत संक्षेप में कितनी ऊँची बात कहते हैं - जधपि मृषा छूटत
- यधपि मृषा छूटत कठिनई परन्तु मेरी महत्वाकांक्षायें मुझे पूर्ण रूपेण भक्ति में जाने से रोकती हैं ।
- महाभारत ने सत्य की मीमाँसा इस प्रकार की है- न तत्व वचन सत्यं , न तत्व वचनं मृषा ।
- अच्छा खंडित सत्य / अज्ञेय अच्छा खंडित सत्य सुघर नीरन्ध्र मृषा से, अच्छा पीड़ित प्यार सहिष्णु अकम्पित निर्ममता से।
- ब्राह्मण - तरुण तापस ! तुम्हें हमारी बात मृषा लग रही है ? ब्राह्मणों का विरद विस्मृत है तुम्हें ?
- हंसकर बोला राधेय , “शल्य, पार्थ की भीति उसको होगी , क्षयमान्, क्षनिक, भंगुर शरीर पर मृषा प्रीति जिसको होगी .
- पर जङ वस्तुओं में आसक्ति से एक मृषा यानी मिथ्या झूठी गाँठ आप में और जङता में लग गयी ।
- जहाँ मृषा संबंध विश्व-मानवता से नर जोड़ रहा है , जन्मभूमि का भाग्य जगत की नीति-शिला पर फोड़ रहा है।
- मैं प्रसन्न सह लूँगी , देव! किंतु मत चुभे तुच्छतम कंटक भी प्रियतम को किंतु, हाय, हो गई मृषा साधना सकल जीवन की;
- कहें आप संकोच छोड़ कर , जो कुछ भी कहना हो , गणित मृषा हो भले , आपको मिथ्या कौन कहेगा ?