मेध्य का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- भरत समस्त शुचि , उज्वल, मेध्य और दलनीय को शृंगार मानते हैं, “अग्निपुराण” (11वीं शती) शृंगार को ही एकमात्र रस बताकर अन्य सबको उसी के भेद मानता है, भोज शृंगार को ही मूल और एकमात्र रस मानते हैं, परंतु उपलब्ध लिखित प्रमाण के आधार पर “रसराज” शब्द का प्रयोग “उज्ज्वलनीलमणि” में भक्तिरस के लिए ही दिखाई देता है।
- भरत समस्त शुचि , उज्वल, मेध्य और दलनीय को श्रृंगार मानते हैं, “अग्निपुराण” (11वीं शती) शृंगार को ही एकमात्र रस बताकर अन्य सबको उसी के भेद मानता है, भोज श्रृंगार को ही मूल और एकमात्र रस मानते हैं, परंतु उपलब्ध लिखित प्रमाण के आधार पर “रसराज” शब्द का प्रयोग “उज्ज्वलनीलमणि” में भक्तिरस के लिए ही दिखाई देता है।
- भरत समस्त शुचि , उज्वल , मेध्य और दलनीय को शृंगार मानते हैं , “ अग्निपुराण ” ( 11 वीं शती ) शृंगार को ही एकमात्र रस बताकर अन्य सबको उसी के भेद मानता है , भोज शृंगार को ही मूल और एकमात्र रस मानते हैं , परंतु उपलब्ध लिखित प्रमाण के आधार पर “ रसराज ” शब्द का प्रयोग “ उज्ज्वलनीलमणि ” में भक्तिरस के लिए ही दिखाई देता है।
- भरत समस्त शुचि , उज्वल , मेध्य और दलनीय को शृंगार मानते हैं , “ अग्निपुराण ” ( 11 वीं शती ) शृंगार को ही एकमात्र रस बताकर अन्य सबको उसी के भेद मानता है , भोज शृंगार को ही मूल और एकमात्र रस मानते हैं , परंतु उपलब्ध लिखित प्रमाण के आधार पर “ रसराज ” शब्द का प्रयोग “ उज्ज्वलनीलमणि ” में भक्तिरस के लिए ही दिखाई देता है।