यजु का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ऋक , यजु: और साममय, अर्थात् शान्तिक, पौष्टिक और आभिचारिक तेज क्रमश:
- ऋक , यजु: और साममय, अर्थात् शान्तिक, पौष्टिक और आभिचारिक तेज क्रमश:
- यजु . १ ० / ४ ५ में कथन है -
- ऋक् साम यजु श्रुति जानने के योग्य शुचि ओंकार हूँ . .
- प्राण की उपासना योग ( यजु : ) के रूप में करें।
- वेद ( ऋग्, यजु, साम तथा अथर्वण), काशी मथुरा आदि तीर्थ, अश्वमेध, राजसूय
- तैत्तिरीय संहिता में भी ऋक् ( ऋग्वेद ), सामन् (सामवेद ) , यजु:
- तैत्तिरीय संहिता में भी ऋक् ( ऋग्वेद ), सामन् (सामवेद ) , यजु:
- पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम् ॥- यजु ० १ ८ . ३ ६
- एवं त्व्यि नान्थेकर तोऽस्ति न कर्म लिप्याते नरे- यजु 40 / 2