विघ्न संतोषी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- विषयपरक लिखते वक्त अगर हम भाषा को लोकप्रिय बनाने की चेष्टा में लगेंगे तो भाषागत गलताफहमिओं से उसे दूर रखना कठिन हो जाएगा जिससे की उसका खंड़न या उस पर विवाद खडा करना विघ्न संतोषी लोगों के लिए सहज हो जाएगा .
- झा जी , आपको जो रुचिकर लगता हो वही किजिये पर एक बात का खयाल रखिये कि जैसे तपस्वियों की तपस्या भंग करने के लिये इंद्र अप्सराएं भेजता था उसी तरह यहां भी कुछ विघ्न संतोषी तत्व हैं जो फ़ूफ़े बनकर उत्पात करते हैं .
- मगर आज खबरिया चैनलों की खबरों को देखकर यह लगता है कि गाँव में रहने वाला विघ्न संतोषी या कुटिल व्यक्ति तो दो-चार बार गाँव के लोगों को आपस में लड़ाकर चुप हो जाता था , क्योंकि फिर लोग उसकी बातों का विश्वास ही नहीं करते थे।
- ५० के पीछे एक बच्चा आज इस मानसिक विकार से ग्रस्त है . विघ्न संतोषी ,विघ्न पैदा करता रहता है ऐसा बच्चा किसी भी गति -विधि में उसका ध्यान नहीं लगता .खेल बिगाड़ा काम बिगाड़ा बना रहता है ऐसा बच्चा इलाज़ और पर्याप्त तवज्जो के अभाव में ।
- ५० के पीछे एक बच्चा आज इस मानसिक विकार से ग्रस्त है . विघ्न संतोषी ,विघ्न पैदा करता रहता है ऐसा बच्चा किसी भी गति -विधि में उसका ध्यान नहीं लगता .खेल बिगाड़ा काम बिगाड़ा बना रहता है ऐसा बच्चा इलाज़ और पर्याप्त तवज्जो के अभाव में ।
- कई बार जातक कथाओं से लेकर पंचतंत्र कथाओं में और बचपन में चंदामामा की कहानियों में किसी न किसी गाँव के किसी दुष्ट व्यक्ति का जिक्र जरुर होता था , जो प्रायः विघ्न संतोषी होता था, उसका यही काम होता था कि गाँव के लोग किसी न किसी वजह से एक दूसरे से लड़ते रहें।
- कभी कभी वो भिक्षा माँग कर नदी किनारे भोजन करने बैठता तो उदंड लोग , विघ्न संतोषी लोग वहा आते..उस को सताते …चने की दाल जान बुझ कर खाते और उस के भोजन के समय उस के नज़दीक जाकर दुर्गंध छोड़ते ….फिर भी वो ब्राम्हण अपने मन को समझाता की मन तेरे को उद्विग्न करने के लिए ये सब करते..अब तू शांत रहे तो तेरी मर्ज़ी..तू अशांत होना चाहे तो तेरी मर्ज़ी..
- कभी कभी वो भिक्षा माँग कर नदी किनारे भोजन करने बैठता तो उदंड लोग , विघ्न संतोषी लोग वहा आते..उस को सताते …चने की दाल जान बुझ कर खाते और उस के भोजन के समय उस के नज़दीक जाकर दुर्गंध छोड़ते ….फिर भी वो ब्राम्हण अपने मन को समझाता की मन तेरे को उद्विग्न करने के लिए ये सब करते..अब तू शांत रहे तो तेरी मर्ज़ी..तू अशांत होना चाहे तो तेरी मर्ज़ी..
- कुछ लोग विघ्न संतोषी होते है जब तक वे विघ्न पैदा न करदें तब तक उन्हें चैन नहीं आता | और मजेदार बात यह कि वे समझते है कि हम बड़े अच्छे काम कर रहे हैं | आपने सही लिखा है कि एक मूर्ख और ह्रदयहीन व्यक्ति के द्वारा जाने अनजाने में कहे गए कडवे बोल किसी संवेदनशील ह्रदय को छलनी कर सकते हैं , और ह्रदयहीन लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता “”