सहज काम का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- खासकर जिन लोगों का प्रोफेशन कंप्यूटर से जुड़ा है , जो घंटों कंप्यूटर पर बैठते हैं और जिनके लिए इंटरनेट यूज करना बिलकुल सहज काम हो, उनके लिए तो दिन भर में कई-कई बार ई-मेल चेक कर लेना बिलकुल नेचुरल है।
- खासकर जिन लोगों का प्रोफेशन कंप्यूटर से जुड़ा है , जो घंटों कंप्यूटर पर बैठते हैं और जिनके लिए इंटरनेट यूज करना बिलकुल सहज काम हो , उनके लिए तो दिन भर में कई-कई बार ई-मेल चेक कर लेना बिलकुल नेचुरल है।
- साढ़े सात लाख लोग गांवों का देश भारत आज के शासकों को कठिन समस्या लगता है , पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चकाचौंध खड़ी करने के लिए भारत की भाषा , भावना एवं भोजन की कुर्बानी देना बड़ा सरल एवं सहज काम लगता है।
- क्योंकि उधार देना , उसका सूद जोड़ना और रुपए वसूल करना अत्यंत भीरु हृदय के लिए भी सहज काम है , बल्कि यह कहना चाहिए कि भीरु हृदय के लिए ही सहज है , उसमें यदि गिनती की भूल न हो तो कोई आशंका ही नहीं।
- हमारे देसी शासकों को भारत के नवनिर्माण का रास्ता तय करने के लिए भारत के गांवों मे जाकर लोक संवाद कर लोक चेतना लाने के बजाय इंडिया के डेवलपमेंट के लिए रोज-रोज विदेशियों को भारत के विकास हेतु खुला निमंत्रण देना सरल एवं सहज काम लगता है।
- हमारे देश का राजनैतिक ढांचा जिस तरह का है , राजनीति का स्वरूप जिस तरह का है , मतदाताओं मानसिकता जिस तरह से मुद्दों-जाति-धर्म-क्षेत्रीयता के आधार पर बनती-बिगडती हों वहां की राजनीतिक हलचल का , चुनावी गतिविधि का आकलन कर पाना सहज काम नहीं होता है .
- आपने अच्छा लिखा है , आदर्शों के आस पास पहुँचने की चाह किस में नहीं होती , आपके ही के समान पद पर कार्यरत छोटे भाई के साथ रहते मैंने काफी करीब से देखा है कि पुलिस में रहते हुए किसी को हंसाना अथवा रिंग टोन सुना कर प्रसन्न कर देना उतना सहज काम नही है जितना कि आपकी पोस्ट से लगता है।
- ठाकुर साहब ने लिखा है : - ‘‘ ऐसे जल के समय में जब पृथ्वी एकार्णव हो रही थी , सिवाय वृक्षों की फुनगियों के और कुछ दिखाई नहीं देता था और जिस समय सब मल्लाहों का टिकरीपारा तक नौका ले जाने में साहस टूट गया था , आपका वहाँ स्वयं इन लोगों को उत्साह देकर लिवा जाना कुछ सहज काम नहीं था।
- मुनि वह है जो सदा प्रसन् न अर्थात विमल चित्त हो , गंभीर अर्थात जिसकी थाह लेना सहज काम न हो , न जिसका पार किसी ने पाया हो जिसे कोई क्षुब् ध चलायमान न कर सके , ये सब गुण स्थिर सागर के हैं , सागर के सदृश् य जिसका मन हो वह मुनि कहा जा सकता है , मौन से सब बातें आदमी में आ सकती हैं।
- इसलिये कि उसकी सुध लेने वाला कोइ नही है हम सभी केवल अपने मे मगन है , . ( . सिर्फ़ , इश्वर को छोड कर ) , .... लोगो के फ़टेहाल हालात , गाँव की गरीबी , मज़दूरी , बेरोजगारी , भूखमरी जैसे अन्तहीन कुन्ठित , सम्वेदनाओ को शब्द देना कोइ सहज काम नही है , यह केवल वही कर सकता है जिसने इसे नजदीक से महसुस किया हो और जिसके पास करुणा , शब्दकोष , का भंडार हो ।