हज़्म का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- मगर चूंकि उसे अपना उहदा व मन्सब ( पद ) ख़तरे में नज़र आ रहा था इस लिये वह हज़रत उसमान के दूसरे उम्माल ( कार्यकर्ताओं ) की तरह उस माल को हज़्म कर जाना चाहता था।
- ( 12 ) कि उसने अपनी किताबों में दूसरे दीन वालों के माल हज़्म कर जाने का हुक्म दिया है , इसके बावुजूद कि वो ख़ूब जानते हैं कि उनकी किताबों में ऐसा कोई हुक्म नहीं है .
- लंबी लाइलाज बीमारियों के शिकार मरीज़ अगर वाक़ई तंदुरूस्त होना चाहते तो वे सबसे पहले ये सारी चीज़ें खाना छोड़ दें और उसके बाद वे ऐसी चीज़ें खाएं जो कि उन्होंने जीवन में बहुत कम खाई हों और जल्दी हज़्म हो जाती हों।
- लंबी लाइलाज बीमारियों के शिकार मरीज़ अगर वाक़ई तंदुरूस्त होना चाहते तो वे सबसे पहले ये सारी चीज़ें खाना छोड़ दें और उसके बाद वे ऐसी चीज़ें खाएं जो कि उन्होंने जीवन में बहुत कम खाई हों और जल्दी हज़्म हो जाती हों।
- इब्ने हज़्म रहिमहुल्लाह ने फरमाया : “ उन्हों ने इस बात पर इत्तिफाक़ किया है कि किसी के लिए अपने आप को क़त्ल करना , या अपने अंगों में से किसी अंग को काटना , या अपने आप को कष्ट और पीड़ा पहुँचाना जाइज़ नहीं है , सिवाय उपचार के अंदर विशिष्ट रूप से पीड़ा से ग्रस्त अंग को काटने के अलावा।
- विद्वानों के एक समूह ने , जिनमें इब्ने हज़्म और शैखुल इस्लाम इब्ने तैमिय्या रहिमहुमुल्लाह शामिल हैं , इस बात को चयन किया है कि मसह की अवधि समाप्त होने से तहारत खत्म नहीं होती है , क्योंकि इसका कोई प्रमाण नहीं है , बल्कि तहारत ( पवित्रता ) सर्वज्ञात वुज़ू तोड़ने वाली चीज़ों से ही समाप्त होती है जैसे हवा खारिज होना।
- स्थिति यह थी कि महाजन क़र्ज़ का पैसा वापस न मिलने के बदले में मवेशी तो खोल ही ले जाता था , घर में बचे-खुचे चारा-पानी को भी हज़म कर जाने की इच्छा उसमें पर्याप्त बलवती थी - पहले तो ' सूर ' खोले महाजन ने जानवर अब चारा हज़्म करने पे आमादा है लईं ज़मीनदारों और पटवारियों के अत्याचार की कथाएं प्रेमचंद साहित्य में पर्याप्त महत्त्व रखती हैं .
- स्वाम विवेकानंद उ . एस. ए. मे थे विश्व धर्म संसद चल रही थे वहा पर लोग उनकी विधवधता को स्म्मानित कर रहे थे दूसरे हिंदुओ को जो वहाँ पर गये थे ये बात हज़्म नही हुई की उनसे छोटे व्यक्ति को इतना सम्मान मिले उन्होने भारत आकर बोलना सुरू किया की वो चरित्र हींन हो गया है ,अंडे-माँस ख़ाता है हिंदू धर्म को कलंकित कर रहा है ,उसे एसा करना चाहिए वैसा करना चाहिए...
- सलफ ( पूर्वजों ) के एक समूह का यही कथन है जिनमें क़तादा , हसन बसरी और इब्ने अबी लैला आदि हैं , और इब्ने हज़्म ने “ अल मुहल्ला ” ( 1 / 105 ) में इसी का समर्थन किया है और शैखुल इस्लाम इब्ने तैमिय्या और इब्नुल मुंज़िर ने इसी को अपनाया है , और नववी ने “ अल-मजमूअ ” ( 1 / 557 ) में कहा है : यही पसंदीदा और सबसे ठोस है।
- अब आप सोचिए कि जब 40 साल तक आदमी एक सी ही बल्कि एक ही चीज़ें लगातार खाता रहेगा तो क्या वे चीज़ें इंसान के शरीर और मन पर अपने गहरे असर न दिखाएंगी ? लंबी लाइलाज बीमारियों के शिकार मरीज़ अगर वाक़ई तंदुरूस्त होना चाहते तो वे सबसे पहले ये सारी चीज़ें खाना छोड़ दें और उसके बाद वे ऐसी चीज़ें खाएं जो कि उन्होंने जीवन में बहुत कम खाई हों और जल्दी हज़्म हो जाती हों।