हराई का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- गॉवो मे एक प्रचलित कहावत कही जाती है कि बूढ़ा बरधा हराई नही भूलता है उसी प्रकार इतने दिनो से हूँ कुछ फार्म गडबड़ जरूर हुआ है किन्तु आशा है कि जल्द प्राप्त कर लूँगा।
- कहते हैं न की बैल हराई नहीं भूलता यानी जुए में नाध तो कुछ आड़ा टेढ़ा चल अच्छी खेती कर देता है . ..ह हा ....और फिर आप कहाँ भूलने वाले .....ऐसे ही पांच करोड़ थोड़े मिले ??
- गॉवो मे एक प्रचलित कहावत कही जाती है कि बूढ़ा बरधा हराई नही भूलता है उसी प्रकार इतने दिनो से हूँ कुछ फार्म गडबड़ जरूर हुआ ह ै किन् तु आशा है कि जल् द प्राप् त कर लूँगा।
- जुताई कई प्रकार की होती है , जैसे गहरी जुताई, छिछली जुताई, अधिक समय तक जुताई, ग्रीष्म ऋतु की जुताई, हलाई या हराई की जुताई, मध्य से बाहर की ओर या किनारे से मध्य की ओर तथा एक किनारे से दूसरे किनारे की ओर जुताई।
- पहले गयाँ के लिए बढ़ाया जाता था अब कमाने के लिए बढ़ाया जाता है अब नंबर वन बनने के लिए बढ़ाया जाता है अब सभी और सदाचारी बनने के लिए नही पढ़ाया जाता है , अब तो चरणस्पार्स की बात कहेंगे तो कहेंगे कहा से आगेया गुज़रे जमाने का आदिमानुष , बहरहाल इन सब के पिच्चे सबसे बड़ी वजह है शिक्षा का व्यपराइकैर्ण होना , पहले कहा जाता था की हराई शिष्य धन शोक न हराई सो गुरु घोर नरक माह पराई , लेकिन अब हराई शिष्य धन शोक ना हराई सो गुरु धनवान बनई ...
- पहले गयाँ के लिए बढ़ाया जाता था अब कमाने के लिए बढ़ाया जाता है अब नंबर वन बनने के लिए बढ़ाया जाता है अब सभी और सदाचारी बनने के लिए नही पढ़ाया जाता है , अब तो चरणस्पार्स की बात कहेंगे तो कहेंगे कहा से आगेया गुज़रे जमाने का आदिमानुष , बहरहाल इन सब के पिच्चे सबसे बड़ी वजह है शिक्षा का व्यपराइकैर्ण होना , पहले कहा जाता था की हराई शिष्य धन शोक न हराई सो गुरु घोर नरक माह पराई , लेकिन अब हराई शिष्य धन शोक ना हराई सो गुरु धनवान बनई ...
- पहले गयाँ के लिए बढ़ाया जाता था अब कमाने के लिए बढ़ाया जाता है अब नंबर वन बनने के लिए बढ़ाया जाता है अब सभी और सदाचारी बनने के लिए नही पढ़ाया जाता है , अब तो चरणस्पार्स की बात कहेंगे तो कहेंगे कहा से आगेया गुज़रे जमाने का आदिमानुष , बहरहाल इन सब के पिच्चे सबसे बड़ी वजह है शिक्षा का व्यपराइकैर्ण होना , पहले कहा जाता था की हराई शिष्य धन शोक न हराई सो गुरु घोर नरक माह पराई , लेकिन अब हराई शिष्य धन शोक ना हराई सो गुरु धनवान बनई ...
- पहले गयाँ के लिए बढ़ाया जाता था अब कमाने के लिए बढ़ाया जाता है अब नंबर वन बनने के लिए बढ़ाया जाता है अब सभी और सदाचारी बनने के लिए नही पढ़ाया जाता है , अब तो चरणस्पार्स की बात कहेंगे तो कहेंगे कहा से आगेया गुज़रे जमाने का आदिमानुष , बहरहाल इन सब के पिच्चे सबसे बड़ी वजह है शिक्षा का व्यपराइकैर्ण होना , पहले कहा जाता था की हराई शिष्य धन शोक न हराई सो गुरु घोर नरक माह पराई , लेकिन अब हराई शिष्य धन शोक ना हराई सो गुरु धनवान बनई ...