अक्कड़ बक्कड़ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- विश्व पुस्तक मेले से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को सँजोए अखबार ' अक्कड़ बक्कड़ टाइम्स' समय पर निकालने के लिए ये नन्हे रिपोर्टर जी-जान से जुटे हैं और यहाँ होने वाली सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
- विश्व पुस्तक मेले से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को सँजोए अखबार ' अक्कड़ बक्कड़ टाइम्स' समय पर निकालने के लिए ये नन्हे रिपोर्टर जी-जान से जुटे हैं और यहाँ होने वाली सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
- भोजपुरी की क्रियाओं और संज्ञाओं में शब्दों के युग्म भी बड़े सटीक ढंग से प्रयुक्त हैं-जैसे अक्कड़ बक्कड़ , अगड़म बगड़म, ताकत वाकत, हरकत बरकत आदि जाहिर है इन शब्दों के प्रयोग से श्रीप्रकाश की कविता की निजी पहचान बनती है।
- प्रयोगवादी अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो , सूई में धागा , चोर भागा की आपाधापी तो अपनी जगह , बगल में ही एक-दूसरे के जुगाड़ के कँचों को गिन कर गेंदतड़ी की भागमभाग , सिर-नुचौव्वल , गाली गुफ़्ता का आलम अपनी जगह ।
- अक्कड़ बक्कड़ बाम्बे बो अस्सी नब्भे पूरे सौ सौ में लगी बिल्ली बिल्ली भागी दिल्ली बोले शेख चिल्ली खेले डंडा गिल्ली गिल्ली गई टूट बच्चे गए रूठ बच्चों को मनाएंगे रस मलाई खायेंगे रस मलाई अच्छी हमने खायी मच्छी मच्छी में काँटा पड़ेगा ज़ोर से चांटा
- उन्दिनो इन्फ्लेशन के फिगर देखकर हमलोग मजाक करते थे कि एक कागज़ पर ३ . ७१, ३.७६, ३.७३, ३.७४ ...वगैरह लिखकर आँख बंद करके अक्कड़ बक्कड़ बोलकर पेंसिल राखी जाती होगी और जिस फिगर पर पेंसिल पडी, उसी को इन्फ्लेशन की डर मान लिया जाता होगा. बड़ी लम्बी कहानी है....किसी दिन तफ्शील से लिखना पड़ेगा.
- था नही साकार पर तू स्वप्न भी कोई नहीं था , हँसते-रोते हर इक पल के अंग-अंग बँधा कहीं था तू फिरेगा फिर उसी मन फिर से प्यारा रूप धर कर है मेरा विश्वास अब ले बंद पलके खोलती हूँ बाट तेरी जोहती हूँ ओ रे बचपन! ओ रे बचपन जीवन के संग क्यों कट्टी मिट्ठी करता है बूढ़ी कबड्डी चक्कर घिन्नी अक्कड़ बक्कड़ बम्बई दिल्ली पुलिस पकड़ती अंडा चोरी मां से लड़कर डंडा गिल्ली ओ रे बचपन छूट गया मन तेरी कुटिया कहीं पड़ा है छ: