अजहूँ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अंतकाल संगी नहिं कोऊ , यह अचरज की रीत॥मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।
- मैया कवहिं बढ़ेगी चोटी ? कितिक बार मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी ।
- अंतकाल संगी नहिं कोऊ , यह अचरज की रीत॥ मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।
- मुझे अनायास ही याद आ गईं कबीर कि पंक्तियाँ - मूंड मुंडावत जुग गया अजहूँ न मिल्या राम।
- काफी का एक उदाहरण इस प्रकार है- अजहूँ उमर की मैं बाली , श्याम मोसे खेलो न होरी …
- अंतकाल संगी नहिं कोऊ , यह अचरज की रीत ॥ मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत ।
- अजहूँ नाव समुद्र में , ना जाने का होय ॥ 153 ॥ कबीरा कलह अरु कल्पना, सतसंगति से जाय ।
- अच्छी प्रस्तुति . ....गुरु पूर्णिमा पर गुरु नानाक की वाणी सुनाने का शुक्रिया मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत ।
- ‘ हे प्राण नाथ ! या घर ते कबहूँ न बाहर गयो,यह पुरातन फ्रीज़ और श्वेत-श्याम टी०वी० अजहूँ ना बदली जा सकी.पड़ोस
- इतना ही नहीं - “ जिहि सरि मारी काल्हि , सो सर मेरे मन बस्या / तिहि सर अजहूँ मार , सर बिन सच पाऊं नहीं . ”