अति विस्तृत का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इस बार काव्य पल्लवन का विषय गंभीर होने के साथ साथ अति विस्तृत भी है , सभी ने इस विषय को अपनी दृष्टि से देखा और अलग अलग तरह की कविताएँ लिखी हैं , एक ही विषय में कितने विचार समा सकते हैं, ये इस बार काव्य पल्लवन पढ़कर स्पष्ट होता है , सभी ने अपने विचारों को बहुत सुंदर रूप से प्रस्तुत किया है , सभी को भाग लेने के लिए बधाई ^^पूजा अनिल
- नहीं बजती उसके हाथ में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,नूपुरों में भी रुन-झुन रुन-झुन नहीं,सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप'है गूँज रहा सब कहीं -व्योम मंडल में, जगतीजल में -सोती शान्त सरोवर पर उस अमल कमलिनी-दल में -सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृत वक्षस्थल में -धीर-वीर गम्भीर शिखर पर हिमगिरि-अटल-अचल में -उत्ताल तरंगाघात-प्रलय घनगर्जन-जलधि-प्रबल में -क्षिति में जल में नभ में अनिल-अनल में -सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप'है गूँज रहा सब कहीं -और क्या है?
- नहीं बजती उसके हाथ में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप, नूपुरों में भी रुन-झुन रुन-झुन नहीं, सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप' है गूँज रहा सब कहीं - व्योम मंडल में, जगतीजल में - सोती शान्त सरोवर पर उस अमल कमलिनी-दल में - सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृत वक्षस्थल में - धीर-वीर गम्भीर शिखर पर हिमगिरि-अटल-अचल में - उत्ताल तरंगाघात-प्रलय घनगर्जन-जलधि-प्रबल में - क्षिति में जल में नभ में अनिल-अनल में - सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप' है गूँज रहा सब कहीं - और क्या है?
- नहीं बजती उसके हाथ में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप, नूपुरों में भी रुन-झुन रुन-झुन नहीं, सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप' है गूँज रहा सब कहीं - व्योम मंडल में, जगतीतल में - सोती शान्त सरोवर पर उस अमल कमलिनी-दल में - सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृत वक्षस्थल में - धीर-वीर गम्भीर शिखर पर हिमगिरि-अटल-अचल में - उत्ताल तरंगाघात-प्रलय घनगर्जन-जलधि-प्रबल में - क्षिति में जल में नभ में अनिल-अनल में - सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा 'चुप चुप चुप' है गूँज रहा सब कहीं - और क्या है?
- नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-अलाप , नूपुरों में भी रुन-रुन रुन-झुन नहीं , सिर्फ एक अव्यक्त शब्द-सा ' चुप चुप चुप है गूंज रहा सब कहीं- व्योम मंडल में , जगतीतल में- सोती शांत सरोवर पर उस अमल कमलिनी दल में- सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृत वक्षस्थल में- धीर-वीर गंभीर शिखर पर हिमगिरि-अटल-अचल में उत्ताल तरंगाघात-प्रलय घनगर्जन-जलाधि-प्रबल में- क्षिति में जल में नभ में अनिल-अनल में- सिर्फ एक अव्यक्त शब्द-सा ' चुप चुप चुप है गूंज रहा सब कहीं- और क्या है ?
- नहीं बजती उसके हाथ में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप , नूपुरों में भी रुन-झुन रुन-झुन नहीं , सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा ' चुप चुप चुप ' है गूँज रहा सब कहीं - व्योम मंडल में , जगतीतल में - सोती शान्त सरोवर पर उस अमल कमलिनी-दल में - सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृत वक्षस्थल में - धीर-वीर गम्भीर शिखर पर हिमगिरि-अटल-अचल में - उत्ताल तरंगाघात-प्रलय घनगर्जन-जलधि-प्रबल में - क्षिति में जल में नभ में अनिल-अनल में - सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा ' चुप चुप चुप ' है गूँज रहा सब कहीं - और क्या है ?