अनाहत नाद का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अनाहत नाद वह सूक्ष्म आकाशीय स्वर है जिसे एक अनुभवी साधक तभी सुन पाता है जब वह ध्यान में विशिष्ट ऊंचाई पर पहुंचता है।
- कबीर कहते हैं कि जब शुद्ध अनाहत नाद का परिचय हो जाता है , तब संकल्प-विकल्पात्मक मन उसी में लय को प्राप्त हो जाता है।
- हम जब बंद हों , यह हमारा शास्त्रीय संगीत जो चल रहा है चौबीस घंटे , यह जब बंद हो तो हमें अनाहत नाद का पता चले।
- १ २ = अक्रिय मूल परमात्व तत्व जो हिरण्यगर्भ रूप में सक्रिय हुआ ; १ ३ = अंतरक्ष में उद्भूत प्रथम मूल अनाहत नाद ( स्वयम उत्पन्न आदि ध्वनि ..
- अनाहत नाद , जिसमें हम कानों पर उँगलियाँ रखकर सुन सकते हैं , ठीक से समझ लेने पर वहाँ पर इस ध्वनि को प्रतिदिन किसी भी समय सुना जा सकता है।
- रविकांत- मैं अनाहत नाद सा सुनता हूँ उस मौन को रात भर आवाज़ देता है कोई उस पार से जो सहारा तू न दे . ... और भक्त को रोका गया ...
- सिद्धासन जैसा दूसरा आसन नहीं है , केवली कुम्भक के समान प्राणायाम नहीं है , खेचरी मुद्रा के समान अन्य मुद्रा नहीं है और अनाहत नाद जैसा कोई नाद नहीं है।
- साक़ी के हाथों ेमें भले ही गरल का पात्र हो , मेरे कानों में मधु का अनाहत नाद गूँजता रहे - कानों में तुम कहती रहना , मधुकण , प्याला , मधुशाला।
- बिना आहत के बिना टंकार के जिसमें स्वास प्रस्वास टिक जाए , सहज अवस्था में स्वास प्रस्वास चलते रहें , और उसी में मन टिकता जाए इसे ही अनाहत नाद कहते हैं।
- द्वितीय शिविर ‘सुरति समाधि ' में अनाहत नाद की गहराईयों में डुबकी लगाने के पश्चात्, फिर आसान हो जाता है परमात्मा के प्रकाशमय स्वरूप को जानना, दिव्य स्वाद और सुगंध का रसपान करना।