अपलाप का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- रामचन्द्रजी के पूछने पर उनके अभिप्राय को जानकर श्रीवसिष्ठजी भी दैव का अपलाप करने वाली युक्तियों से ही जगत् के अपलाप द्वारा अद्वितीय आत्मतत्त्व को समझाने की इच्छा से ' पूर्वोक्त दोनों पक्षों में फलतः कोई भेद नहीं है , इस गूढ़ अभिप्राय से प्रथम पक्ष का अवलम्बन कर उक्त अर्थ को ही कहते हैं।
- रामचन्द्रजी के पूछने पर उनके अभिप्राय को जानकर श्रीवसिष्ठजी भी दैव का अपलाप करने वाली युक्तियों से ही जगत् के अपलाप द्वारा अद्वितीय आत्मतत्त्व को समझाने की इच्छा से ' पूर्वोक्त दोनों पक्षों में फलतः कोई भेद नहीं है , इस गूढ़ अभिप्राय से प्रथम पक्ष का अवलम्बन कर उक्त अर्थ को ही कहते हैं।
- कान्हा , राधा से क्यों रूठे “ मिल जाए कहीं कान खींच कर कह दूं ...”कान्हा , अब ना चलने की है रे तेरी चतुराई!” समझाया मन को .... फर्क है कृष्ण में , आम इंसान में ...बहुत फर्क है ! ब्लॉग दुनिया में लौटे फिर से ...देखा तो गिरिजेश जी अपलाप कर रहे हैं .... उधर आनद द्विवेदी जी कह रहे थे ...
- कुतार्किकता को प्राप्त होकर विद्वानों के अनुभव का अपलाप करने वाले अपवित्र देहात्मभावविषयक होने और अपवित्र कुत्ते , सूअर आदि की योनिप्रद होने के कारण अपवित्र विकल्पों से अर्थात् ब्रह्म प्रमाण सहित है या प्रमाण रहित ? यदि सप्रमाण है , तो अद्वैत की हानि होगी , यदि अप्रमाण है , तो प्रमेय की हानि होगी इत्यादि विकल्पों से परम पुरुषार्थ को प्राप्त कराने वाली प्रबुद्धता का विनाश नहीं करना चाहिए।
- ( शंका- एष ह्येव साधु कर्म कारयति तं यमेम्यो लोकेभ्य उन्निनीषते ( यही उस पुरुष से अच्छे कर्म करवाता है , जिसका इस लोक से उद्धार करने की इच्छा करता है ) य आत्मनि तिष्ठन् आत्मनमन्तसे यमयति ( जो अन्तर्यामी आत्मा में स्थित होकर आत्मा का नियन्त्रण करता है ) , ईश्वरः सर्वभूतानां हृदेशेऽर्जुन तिष्ठति ( हे अर्जुन , ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में स्थित है ) इत्यादि श्रुति और स्मृतियों से विरुद्ध ईश्वर का अपलाप कर जीव की स्वतन्त्रता कैसे कहते हैं ?