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अरिष्टनेमि का अर्थ

अरिष्टनेमि अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. भगवान अरिष्टनेमि का जन्म यदुकुल के ज्येष्ठ पुरूष दशार्ह -अग्रज समुद्रविजय की रानी शिवा देवी की रत्नकुक्षी से श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन हुआ | समुद्रविजय शौर्यपुर के राजा थे | जरासंध से चलते विवाद के कारण समुद्रविजय यादव परिवार सहित सौराष्ट्र प्रदेश में समुद्र तट के निकट द्वारिका नामक नगरी बसाकर रहने लगे | श्रीक्रष्ण के नेत्रत्व में द्वारिका को राजध
  2. भगवान अरिष्टनेमि का जन्म यदुकुल के ज्येष्ठ पुरूष दशार्ह -अग्रज समुद्रविजय की रानी शिवा देवी की रत्नकुक्षी से श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन हुआ | समुद्रविजय शौर्यपुर के राजा थे | जरासंध से चलते विवाद के कारण समुद्रविजय यादव परिवार सहित सौराष्ट्र प्रदेश में समुद्र तट के निकट द्वारिका नामक नगरी बसाकर रहने लगे | श्रीक्रष्ण के नेत्रत्व में द्वारिका को राजधानी बनाकर यादवों ने महान उत्कर्ष किया |
  3. उनके चारों ओर अपने अपने विमानों पर नमुचि शम्बर बाण , विप्रचिन्ति , अयोमुख , द्विमूर्घा , कालनाम , प्रहेति , हेति , इल्वल , शकुनि , भूतसंताप , बज्रदष्ट , हयग्रीव , शंकशिरा , कपिल , मेघ दुंदभि , तारक , चक्राक्ष , शुम्भ , निशुम्भ , जम्म , उत्कल , अरिष्ट , अरिष्टनेमि , त्रिापुराधिपति , मय , पोलोम , कालेय और निवात कवच आदि अपनी सेनाओं के साथ विमानों पर थे।
  4. उनके चारों ओर अपने अपने विमानों पर नमुचि शम्बर बाण , विप्रचिन्ति , अयोमुख , द्विमूर्घा , कालनाम , प्रहेति , हेति , इल्वल , शकुनि , भूतसंताप , बज्रदष्ट , हयग्रीव , शंकशिरा , कपिल , मेघ दुंदभि , तारक , चक्राक्ष , शुम्भ , निशुम्भ , जम्म , उत्कल , अरिष्ट , अरिष्टनेमि , त्रिापुराधिपति , मय , पोलोम , कालेय और निवात कवच आदि अपनी सेनाओं के साथ विमानों पर थे।
  5. वासुदेव श्री क्रष्ण एवं तीर्थंकर अरिष्टनेमि न केवल समकालीन युगपुरूष थे बल्कि पैत्रक परम्परा से भाई भी थे | भारत की प्रधान ब्राह्मण और श्रमण -संस्क्रतियों नें इन दोनों युगपुरूषों को अपना -अपना आराध्य देव माना है | ब्राह्मण संस्क्रति ने वासुदेव श्री क्रष्ण को सोलहों कलाओं से सम्पन्न विष्णु का अवतार स्वीकारा है तो श्रमण संस्क्रति ने भगवान अरिष्टनेमि को अध्यात्म के सर्वोच्च नेता तीर्थंकर तथा वासुदेव श्री क्रष्णा को महान कर्मयोगी एवं भविष्य का तीर्थंकर मानकर दोनों महापुरुषों की आराधना की है |
  6. वासुदेव श्री क्रष्ण एवं तीर्थंकर अरिष्टनेमि न केवल समकालीन युगपुरूष थे बल्कि पैत्रक परम्परा से भाई भी थे | भारत की प्रधान ब्राह्मण और श्रमण -संस्क्रतियों नें इन दोनों युगपुरूषों को अपना -अपना आराध्य देव माना है | ब्राह्मण संस्क्रति ने वासुदेव श्री क्रष्ण को सोलहों कलाओं से सम्पन्न विष्णु का अवतार स्वीकारा है तो श्रमण संस्क्रति ने भगवान अरिष्टनेमि को अध्यात्म के सर्वोच्च नेता तीर्थंकर तथा वासुदेव श्री क्रष्णा को महान कर्मयोगी एवं भविष्य का तीर्थंकर मानकर दोनों महापुरुषों की आराधना की है |
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